गाजियाबाद। भारतीय प्रदर्शन कलाकारों को आत्मनिर्भर और व्यवसायिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से जयपुरिया बिजनेस स्कूल गाजियाबाद ने Kala Kalp Cultural Institute के सहयोग से अपने परिसर में तीन दिवसीय कार्यशाला ‘एस्पायर’ का सफल आयोजन किया। यह पहल कलाकारों को कला के साथ-साथ व्यवसाय विकास, संचार कौशल और डिजिटल उपस्थिति के क्षेत्र में दक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।
व्यवसाय और कला का संगम
‘एस्पायर’ कार्यशाला का उद्देश्य कलाकारों को यह सिखाना था कि वे स्वयं को पेशेवर रूप से कैसे प्रस्तुत करें, सोशल मीडिया पर प्रभावी पहचान कैसे बनाएं, अपना बायोडाटा और पोर्टफोलियो किस प्रकार तैयार करें तथा तकनीकी और प्रबंधन कौशल के माध्यम से अपने करियर को सतत और सशक्त कैसे बनाएं।
कार्यक्रम का उद्घाटन जयपुरिया बिजनेस स्कूल के निदेशक तपन कुमार नायक और कला कल्प की निदेशक Dr. Atasi Mishra ने संयुक्त रूप से किया। उद्घाटन सत्र में शिक्षा और कौशल विकास को साथ-साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव
कार्यशाला में डीन नितिन सक्सेना, सहायक प्रोफेसर डॉ. स्वधा भारतीय, कला कल्प के उपाध्यक्ष मोहित माधव और एसएम कंसल्टेंसी के निदेशक शमशेर उप्पल ने महत्वपूर्ण सत्रों का संचालन किया।
मोहित माधव ने दोनों संस्थानों के बीच इस परियोजना को साकार करने में अहम भूमिका निभाई और कलाकारों को उद्योग के अनुरूप कौशल विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
ओडिसी नृत्यांगना डॉ. अतासी मिश्रा ने कहा कि उनका उद्देश्य युवाओं को ऐसे अवसर प्रदान करना है, जिससे पारंपरिक और लोक कलाकार भविष्य में मजबूती से स्थापित हो सकें। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुनर्स्थापन के महत्व पर बल देते हुए संस्कृति मंत्रालय द्वारा उपलब्ध विभिन्न योजनाओं और अवसरों की जानकारी भी दी।
शमशेर उप्पल ने कला प्रदर्शन में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए उपलब्ध छात्रवृत्ति सुविधाओं पर प्रकाश डाला, जिससे कलाकारों को आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन मिल सके।

कलाकार-उद्यमियों की नई लहर
तीन दिवसीय ‘एस्पायर’ कार्यशाला के समापन के साथ जयपुरिया बिजनेस स्कूल और कला कल्प सांस्कृतिक संस्थान के बीच बना सहयोग कलाकारों के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ। इस पहल ने न केवल प्रतिभागियों को उद्योग के लिए तैयार कौशल प्रदान किए, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।
कला कल्प की सांस्कृतिक विशेषज्ञता और जयपुरिया की अकादमिक दक्षता के संगम से यह पहल कलाकार-उद्यमियों की एक नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में अग्रसर है—ऐसे कलाकार जो अपनी परंपराओं से जुड़े रहते हुए वैश्विक मंच पर अपनी पहचान मजबूत करेंगे।














