भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में मौजूद प्राचीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों को लेकर केंद्र सरकार ने संसद में विस्तृत जानकारी दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में फिलहाल कोई भी संरक्षित स्मारक या स्थल “लापता” नहीं है, जबकि ASI के अधीन कुल 3,686 संरक्षित स्मारक और संरक्षित क्षेत्र हैं।
गुरुवार को राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 (AMASR Act, 1958) के तहत देशभर में 3,686 स्मारकों और स्थलों को संरक्षित घोषित किया गया है।
स्मारकों की जानकारी पब्लिक डोमेन में
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सभी संरक्षित स्मारकों से जुड़ी अधिसूचनाएं—जिनमें उनकी घोषणा की तारीखें भी शामिल हैं—पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं। ये जानकारियां ई-गजट, “अभिलेख पटल” पोर्टल और केंद्र व राज्य सरकारों के अभिलेखागार में देखी जा सकती हैं।
कोई संरक्षित स्मारक लापता नहीं
सरकार से यह भी पूछा गया था कि क्या कोई संरक्षित स्मारक लापता है, उनके अंतिम ज्ञात स्थान क्या हैं और उन्हें खोजने या पुनर्स्थापित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। इस पर मंत्री शेखावत ने साफ कहा कि “फिलहाल ASI के अंतर्गत कोई भी संरक्षित स्मारक या स्थल लापता नहीं है।”
अवैध निर्माण के मामले स्वीकार
हालांकि सरकार ने यह भी माना कि देश के कई केंद्रीय संरक्षित स्मारकों के आसपास प्रतिबंधित और विनियमित क्षेत्रों में अवैध निर्माण के मामले सामने आए हैं। मंत्री ने बताया कि ऐसे मामलों में कानून के तहत कार्रवाई की गई है, जिसमें नोटिस जारी करना, निर्माण कार्य रोकना, अवैध ढांचों को ध्वस्त करना और आगे उल्लंघन रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय शामिल है।
कितनी साइटों पर एंट्री फीस?
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ASI के संरक्षण में मौजूद 3,686 स्मारकों और स्थलों में से केवल 143 साइटों पर ही प्रवेश शुल्क (एंट्री फीस) लिया जाता है, जबकि अधिकांश स्मारक आम जनता के लिए नि:शुल्क हैं।
CAG रिपोर्ट का संदर्भ
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की वर्ष 2013 की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 92 संरक्षित स्मारक लापता पाए गए थे। बाद में ASI द्वारा किए गए सर्वे में 74 स्मारकों का पता लगा लिया गया, जबकि 18 स्मारक और स्थल खराब स्थिति में पाए गए। इस संबंध में केंद्र सरकार ने दिसंबर 2023 और दिसंबर 2024 में संसद को जानकारी दी थी।
सरकार ने दोहराया कि ASI न केवल केंद्रीय संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का कार्य करता है, बल्कि उनकी सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी भी उसी के पास है।














