यूपी पंचायत ब्रेकिंग – इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2026 समय पर न कराए जाने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा है कि संवैधानिक समय सीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हो रही और क्या आयोग तय समय में चुनाव कराने की स्थिति में है। यह सवाल मंगलवार को याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन की याचिका पर सुनवाई के दौरान उठाया गया।
मामले की सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने आयोग से 19 फरवरी 2026 की अधिसूचना के आधार पर चुनाव तैयारियों की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि पंचायत चुनाव 26 मई 2026 तक या उससे पहले कराए जाने चाहिए। अगली सुनवाई 25 मार्च को दोपहर 2 बजे होगी।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद 243E के अनुसार पंचायत का कार्यकाल अधिकतम 5 वर्ष ही हो सकता है, इसलिए समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। उल्लेखनीय है कि 2021 में हुए पंचायत चुनाव के आधार पर वर्तमान प्रतिनिधियों का कार्यकाल 2 मई 2026 को समाप्त हो जाएगा।
वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग ने कोर्ट में कहा कि चुनाव की अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, जो आयोग के परामर्श से की जाती है। ऐसे में देरी के लिए सरकार की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
पंचायत चुनाव में देरी के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। पहला, मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य 27 मार्च तक पूरा होगा। दूसरा, प्रशासनिक अमला आगामी जनगणना के हाउस लिस्टिंग कार्य में व्यस्त रहेगा, जो सितंबर तक चल सकता है।
इसके अलावा पंचायतों में आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया भी अभी शुरू नहीं हुई है। पंचायतीराज विभाग को इसके लिए कमेटी बनानी है, जिसमें लगभग दो महीने का समय लग सकता है। फिलहाल विभाग और सरकार की ओर से चुनाव को लेकर कोई ठोस तैयारी नजर नहीं आ रही है, जिससे समय पर चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।














