नई दिल्ली : 12 जून 2025 को हुए एअर इंडिया–अहमदाबाद विमान हादसे पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को तीन सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इस भीषण दुर्घटना में 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों सहित कुल 260 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे।
केंद्र से मांगी प्रक्रियात्मक रिपोर्ट
बुधवार (11 फरवरी) को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार से अब तक अपनाए गए प्रक्रियात्मक प्रोटोकॉल पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। यह निर्देश तब आया जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि AAIB की जांच अंतिम चरण में है और कुछ हिस्से विदेशी एजेंसियों के सहयोग से पूरे किए जाने हैं।
सरकार ने विस्तृत सुनवाई के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए मामले को तीन सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का संकेत दिया।
हादसे की पृष्ठभूमि
एयर इंडिया की बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर (फ्लाइट AI171) 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए रवाना हुई थी। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
पीठ ने स्पष्ट किया कि AAIB की भूमिका दुर्घटना के कारणों की जांच तक सीमित है, न कि किसी मंशा या आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण करना।
स्वतंत्र जांच की मांग
सुप्रीम कोर्ट तीन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें इस त्रासदी की स्वतंत्र और कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की गई है।
एनजीओ ‘सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन’ की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि तीन अन्य बोइंग 787 विमानों के साथ भी इसी तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जांच दल के पांच सदस्य DGCA से हैं, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
भूषण ने यह भी दावा किया कि 8,000 से अधिक पायलटों का मानना है कि बोइंग 787 सुरक्षित नहीं है और इसे ग्राउंड किया जाना चाहिए। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केवल मीडिया रिपोर्टों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए और किसी विशेष विमान या एयरलाइन पर टिप्पणी करते समय सतर्क रहना चाहिए।
सीलबंद लिफाफे पर चर्चा
शुरुआत में पीठ ने जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करने पर विचार किया, लेकिन सरकार ने आश्वासन दिया कि जांच का विवरण अदालत के साथ साझा किया जाएगा।
इससे पहले 13 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता पुष्कराज सभरवाल की याचिका पर केंद्र और DGCA को नोटिस जारी किया था। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स और एक विधि छात्र ने भी इसी तरह की याचिकाएं दायर की हैं।
मीडिया नैरेटिव पर कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने पहले स्पष्ट किया था कि AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में मृतक पायलट को दोषी नहीं ठहराया गया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि पायलटों की कथित लापरवाही से जुड़ी रिपोर्टों के चयनात्मक प्रकाशन ने एक दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना मीडिया नैरेटिव को जन्म दिया।
याचिकाओं में दावा किया गया है कि सरकारी जांच नागरिकों के जीवन, समानता और सच्ची जानकारी तक पहुंच के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।
अब तीन सप्ताह बाद पेश होने वाली AAIB की रिपोर्ट पर सबकी निगाहें टिकी हैं, जो इस भयावह हादसे के कारणों पर महत्वपूर्ण प्रकाश डाल सकती है।














