Friday, January 16, 2026
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एजेंटिक एआई के दौर में भारतीय बैंकिंग और फिनटेक का नया रूप

 

एजेंटिक एआई और नया फ़ाइनेंशियल ऑपरेटिंग मॉडल
एजेंटिक एआई के दौर में फिनटेक और बैंकिंग का भविष्य कैसा होगा? अब तक एआई का उपयोग पेमेंट फेल्योर कम करने, फ्रॉड डिटेक्शन सुधारने और कस्टमर सर्विस तेज़ करने जैसे काम-विशेष समाधानों में हुआ है। AWS इंडिया के फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ और कॉन्ग्लोमेरेट्स के हेड, किरण जगन्नाथ के अनुसार, अगला बड़ा चरण एजेंटिक एआई का है—ऐसे कई एआई एजेंट, जिनमें इंसान जैसी तर्क क्षमता हो और जो मिलकर एंड-टू-एंड प्रक्रियाएँ पूरी कर सकें। भारत के बैंक, बीमा कंपनियाँ और फिनटेक फर्में कस्टमर-फेसिंग फ़ंक्शनों में एआई-समर्थ समाधानों का प्रोटोटाइप, परीक्षण और डिप्लॉयमेंट कर रही हैं और सिर्फ़ सॉफ़्टवेयर ख़रीदने वालों से आगे बढ़कर सॉफ़्टवेयर बिल्डर बन रही हैं। क्लाउड, जेनरेटिव एआई, एजेंटिक ऑर्केस्ट्रेशन, डेटा मॉडर्नाइज़ेशन और बदलती संगठनात्मक संस्कृति मिलकर फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ के लिए एक नए तरह का ऑपरेटिंग मॉडल बना रहे हैं।

क्लाउड, लेगेसी और एजेंटिक एआई की तकनीकी नींव
फिनटेक स्टार्टअप “डिजिटल नेटिव” हैं—वे क्लाउड पर ही पैदा हुए हैं और उनके पास कम लेगेसी सिस्टम हैं। बीमा क्षेत्र ने भी लगभग 2017 से क्लाउड अपनाकर डेटा-ड्रिवन इनोवेशन के ज़रिए तेज़ी से अलग पहचान बनाई। बैंकों ने क्लाउड की ओर रुख थोड़ा देर से किया, लेकिन COVID-19 और UPI के विस्फोटक विस्तार ने उन्हें तेज़ क्लाउड अपनाने और ऑटो-स्केलिंग की ओर धकेला; लॉकडाउन में कुछ ही हफ्तों में डिजिटल चैनल स्केल करना और अनिश्चित, तेज़ी से बढ़ती UPI वॉल्यूम संभालना दिखाता है कि क्लाउड-नेटिव आर्किटेक्चर अब ज़रूरत हैं। आज बहस “क्लाउड अपनाना है या नहीं” की नहीं, बल्कि “सही आर्किटेक्चर और माइग्रेशन पाथ” की है—यही एजेंटिक एआई के लिए ज़मीन तैयार करता है। KYC, मर्चेंट ऑनबोर्डिंग, मॉर्गेज ओरिजिनेशन जैसे डॉक्यूमेंट-हेवी वर्कफ़्लो में एजेंटिक एआई एजेंट डेटा इकट्ठा करना, वेरिफ़िकेशन और सिस्टम एंट्री जैसे दोहराव वाले काम सँभाल सकते हैं, जिससे कर्मचारी रिलेशनशिप मैनेजमेंट, रिस्क जजमेंट और प्रोडक्ट इनोवेशन जैसी अधिक मूल्य-सृजन वाली गतिविधियों पर ध्यान दे सकें। लेकिन यह बदलाव पुराने कोर सिस्टम, मोनोलिथिक ऐप्स और बिखरे, असंगत डेटा आर्किटेक्चर पर सिर्फ़ एक परत चढ़ाकर संभव नहीं है; एजेंटिक एआई की पूरी क्षमता के लिए क्लाउड-नेटिव माइक्रोसर्विसेस, ऑटो-स्केलिंग और रेज़िलिएंट, डी-कपल्ड सिस्टम की ओर संक्रमण अनिवार्य है।

कल्चर, टीमें और भविष्य का बैंकिंग अनुभव
तकनीक के साथ-साथ संगठनात्मक संस्कृति में भी बड़ा परिवर्तन आएगा। पुरानी, कड़ी वर्कफ़्लो संरचनाएँ टूटेंगी और उनकी जगह छोटी, क्रॉस-फंक्शनल, टेक्नो-फ़ंक्शनल टीमें लेंगी, जो बिज़नेस और टेक्नोलॉजी को साथ जोड़कर पूरे एजेंटिक वर्कफ़्लो डिज़ाइन और मैनेज करेंगी। आने वाले समय में बैंकिंग अनुभव भी बदलेगा: नेविगेशन-भारी मोबाइल ऐप के बजाय अधिक कॉन्टेक्स्टुअल और वॉयस-ड्रिवन इंटरफ़ेस होंगे, जहाँ ग्राहक सिर्फ़ बोलकर या सरल निर्देश देकर अपने काम करा सकेंगे और एजेंट बैकएंड लॉजिक संभालेंगे। बैंकिंग उपयोगकर्ता के रोज़मर्रा के डिजिटल अनुभव—जैसे ऑनलाइन शॉपिंग या पेमेंट—में सहज रूप से एम्बेड हो जाएगी; बैलेंस चेक करना, क्रेडिट ऑफ़र देखना या पेमेंट पूरा करना उसी फ्लो का स्वाभाविक हिस्सा बन जाएगा, अलग से “बैंकिंग करने” की ज़रूरत नहीं रहेगी। संक्षेप में, एजेंटिक एआई कुछ नए टूल जोड़ने से आगे बढ़कर भारतीय फिनटेक और बैंकिंग के पूरे ऑपरेटिंग मॉडल, टेक्नोलॉजी स्टैक और कार्य-संस्कृति को पुनर्परिभाषित करने वाली लहर है।

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