लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब को लेकर दिए गए बयान पर शुरू हुआ गतिरोध मंगलवार को समाप्त हो गया। लोकसभा स्पीकर और संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू के साथ हुई बैठक के बाद सदन की कार्यवाही सामान्य हुई, जिसके बाद दोपहर करीब 2 बजे से केंद्रीय बजट 2026-27 पर चर्चा शुरू की गई। बजट चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार को आर्थिक, सामाजिक और संघीय ढांचे से जुड़े कई मुद्दों पर कठघरे में खड़ा किया।
शशि थरूर का हमला: “हेडलाइन मैनेजमेंट का बजट”
बजट पर चर्चा की शुरुआत कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने की। उन्होंने कहा कि सरकार के कुल खर्च में कमी आई है, जबकि टैक्स कलेक्शन लगभग स्थिर बना हुआ है। थरूर ने आरोप लगाया कि इस बजट में कॉरपोरेट्स के बजाय आम करदाताओं पर ज्यादा कर का बोझ डाला गया है।
उन्होंने बजट की तुलना एक दुर्घटनाग्रस्त कार में एयरबैग को इधर-उधर करने से की और कहा कि यात्रियों को यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि चेसिस मजबूत है और आगे चलकर सब बेहतर लगेगा। थरूर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह बजट केवल “हेडलाइन मैनेजमेंट” है, जिसमें वादे बड़े हैं, आंकड़े भव्य हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन साफ तौर पर नदारद है।
कृषि क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की घोषणाएं आधुनिक प्रेमालाप जैसी हैं, जहां वादे तो बहुत हैं, लेकिन कमिटमेंट नहीं।
अखिलेश यादव: “दिशाहीन बजट, 2047 के सपने से दूर”
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आम बजट को दिशाहीन करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बजट 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में मददगार साबित नहीं होगा। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बजट सामाजिक और आर्थिक असमानता के मुद्दे पर न्याय नहीं करता।
उन्होंने बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा हो सकता है, जब गरीब और अमीर—दोनों को समान अवसर और समानता का अधिकार मिले।
अमेरिका से ट्रेड डील पर सवाल
अखिलेश यादव ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील को एकतरफा बताते हुए कहा कि इससे कृषि आयात बढ़ेगा और भारतीय किसानों को भारी नुकसान होगा। उनका आरोप था कि भारतीय बाजार अमेरिकी कृषि उत्पादों से भर जाएंगे, जिससे घरेलू किसानों की आजीविका पर संकट आएगा।
उन्होंने कहा कि यह समझौता उद्योग की संभावनाओं को भी नुकसान पहुंचाएगा और ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को पीछे धकेल देगा। ट्रेड डील में देरी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अगर बदले में भारत को यही मिलना था, तो यह समझौता 11 महीने पहले ही हो सकता था।
अभिषेक बनर्जी: “बंगाल की अनदेखी, केंद्र पर पक्षपात का आरोप”
तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने सरकार पर पश्चिम बंगाल की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने 85 मिनट का भाषण दिया, लेकिन उसमें एक बार भी बंगाल का जिक्र नहीं किया गया।
उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल को अब तक करीब 1.90 लाख करोड़ रुपये का बकाया नहीं दिया गया है। बनर्जी ने कहा कि संविधान राज्यों के बीच समानता की बात करता है, लेकिन केंद्र सरकार एनडीए शासित राज्यों को ज्यादा फंड देकर विपक्ष शासित राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि बजट में जिस दानकुनी से मालवाहक कॉरिडोर का जिक्र किया गया है, उसकी घोषणा मूल रूप से 2009 में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने की थी।
बीजेपी का पलटवार: “शानदार और दूरदर्शी बजट”
विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी ने बजट को शानदार और दूरदर्शी बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट सरकार की प्रतिबद्धता, दृढ़ विश्वास और नीति में निरंतरता को दर्शाता है।
कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक हालात में भारत ने चतुराई से अपने हितों की रक्षा करते हुए आगे बढ़ने की क्षमता साबित की है।
कुल मिलाकर, लोकसभा में बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिसमें अर्थव्यवस्था, किसान, बेरोजगारी, संघीय ढांचा और वैश्विक व्यापार जैसे मुद्दे केंद्र में रहे।














