Tuesday, February 10, 2026
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“अदालतों में गुंडा राज नहीं चलेगा” — तीस हजारी कोर्ट हमले पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार, CJI ने बताया कानून के शासन की विफलता

नई दिल्ली: दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट परिसर में एक वकील पर हुए कथित हमले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने अदालत परिसर के भीतर हिंसा को “गुंडा राज” करार देते हुए साफ कहा कि इस तरह की घटनाएं कानून के शासन की सीधी विफलता हैं और इन्हें किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

यह टिप्पणी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने जस्टिस जॉयमलया बागची और जस्टिस एनवी अंजारी की पीठ के समक्ष मामले के उल्लेख के दौरान की। पीठ ने कहा कि अदालतें न्याय का मंदिर हैं और अगर वहीं हिंसा होगी तो यह पूरी न्यायिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

मामले का जिक्र करने वाले वकील ने बताया कि 7 फरवरी को यह घटना तीस हजारी कोर्ट में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश हरजीत सिंह पाल की अदालत में हुई। वकील के अनुसार, वह एक आरोपी की ओर से पेश हुए थे, जिसके बाद शिकायतकर्ता के वकील ने कथित तौर पर कुछ असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर उन पर हमला किया और उनकी पिटाई की। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय न्यायाधीश अदालत में मौजूद थे और अदालत का स्टाफ भी वहीं था।

इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा,
“इस तरह का गुंडा राज हमें स्वीकार्य नहीं है। अगर अदालत परिसर के अंदर हिंसा होती है, तो इसका सीधा मतलब है कि कानून के शासन में कहीं न कहीं गंभीर चूक हुई है।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या इस घटना की जानकारी दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को दी गई है। जब वकील ने बताया कि इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई है, तो पीठ ने तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए।

अदालत ने पीड़ित वकील को आदेश दिया कि वह इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखें और उस पत्र में CJI को भी मार्क करें। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसके बाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस मामले में संज्ञान लेंगे और आगे की कार्रवाई प्रशासनिक स्तर पर की जाएगी।

पीठ ने वकील को प्रक्रिया का पालन करने, संबंधित हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में जाने और वहां से उचित राहत मांगने की भी सलाह दी। साथ ही कहा गया कि अदालत परिसर की सुरक्षा और गरिमा बनाए रखना न्यायपालिका और प्रशासन—दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी न सिर्फ इस विशेष घटना पर सख्त संदेश है, बल्कि देश भर की अदालतों में सुरक्षा व्यवस्था और अनुशासन को लेकर एक गंभीर चेतावनी के रूप में भी देखी जा रही है।

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