Tuesday, February 10, 2026
Your Dream Technologies
HomeChhattisgarh“सांप्रदायिक फासीवाद के खिलाफ रचनात्मक प्रतिरोध का संकल्प: रायपुर में छत्तीसगढ़ जलेस...

“सांप्रदायिक फासीवाद के खिलाफ रचनात्मक प्रतिरोध का संकल्प: रायपुर में छत्तीसगढ़ जलेस का चौथा राज्य सम्मेलन संपन्न”

रायपुर: लेखकों, कलाकारों और संस्कृतिकर्मियों की रचनात्मक एवं सामाजिक-राजनीतिक भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ जनवादी लेखक संघ (जलेस) का चौथा राज्य सम्मेलन 7 फरवरी को रायपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में सांप्रदायिक फासीवाद के खिलाफ वैचारिक संघर्ष को तेज करने और जनवादी-धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए व्यापक सांस्कृतिक एकता बनाने का आह्वान किया गया।

सम्मेलन में प्रसिद्ध कथाकार कामेश्वर पांडेय (कोरबा) को अध्यक्ष, लेखक-पत्रकार पूर्णचंद्र रथ (रायपुर) को राज्य सचिव तथा शायर मुमताज (भिलाई) को कोषाध्यक्ष निर्वाचित किया गया। सम्मेलन में प्रदेश के 17 जिलों से आए साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों ने सक्रिय भागीदारी की।

उद्घाटन सत्र में फासीवादी सांस्कृतिक राजनीति पर तीखा प्रहार

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में जलेस के राष्ट्रीय महासचिव नलिन रंजन सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने अपने विचारोत्तेजक वक्तव्य में संविधान में निहित जनवादी मूल्यों पर हो रहे हमलों और देशभर में प्रगतिशील लेखकों-संस्कृतिकर्मियों के खिलाफ बढ़ते दमन की कड़ी आलोचना की।
नलिन रंजन सिंह ने भाजपा की दक्षिणपंथी सांस्कृतिक नीतियों और आरएसएस की फासीवादी विचारधारा पर हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता के संरक्षण में देश की साझी संस्कृति, धर्मनिरपेक्षता और जनवाद को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने इतिहास के विकृतिकरण, वैज्ञानिक चेतना को कुंद करने और वर्ण व्यवस्था जैसी पिछड़ी सोच को थोपने के प्रयासों को खतरनाक बताया।
उन्होंने कहा कि आरएसएस जिस ज्ञान परंपरा की बात करता है, वह वेद-पुराणों की कबीलाई संस्कृति तक सीमित है, जबकि प्रगतिशील लेखक कबीर, प्रेमचंद, राहुल सांकृत्यायन, भगत सिंह, नागार्जुन और मुक्तिबोध की परंपरा के वाहक हैं। उन्होंने 1936 में प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना के समय प्रेमचंद के अध्यक्षीय भाषण की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए साहित्य को राजनीति से आगे चलने वाली मशाल बनाए रखने का आह्वान किया।

‘कारपोरेट पूंजी और सांप्रदायिक फासीवाद’ पर गंभीर विमर्श

उद्घाटन सत्र के विमर्श खंड में “कारपोरेट पूंजी, सांप्रदायिक फासीवाद और रचनात्मक प्रतिरोध” विषय पर प्रसिद्ध आलोचक प्रो. जयप्रकाश (राजनांदगांव) और कथाकार कामेश्वर पांडेय ने अपने विचार रखे। दोनों वक्ताओं ने हिंदुत्व की राजनीति और कॉर्पोरेट पूंजी के गठजोड़ को उजागर करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में संस्कृतिकर्मियों को सिर्फ लेखन तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि रचनात्मक हस्तक्षेप के साथ सड़कों पर भी उतरना होगा।
उन्होंने कहा कि कला का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आम जनता की सांस्कृतिक चेतना को विकसित करना है। जब कला जनता से जुड़ती है, तभी वह जीवंत और प्रतिरोध की शक्ति बनती है।

सांगठनिक सत्र में विस्तार और सक्रियता पर जोर

सम्मेलन के दूसरे सत्र में सांगठनिक मुद्दों पर चर्चा हुई। राज्य सचिव पूर्णचंद्र रथ ने सांगठनिक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जबकि कोषाध्यक्ष डॉ. सुखनंदन सिंह नंदन ने आय-व्यय का विवरण रखा। दोनों रिपोर्टों पर प्रतिनिधियों ने विस्तार से चर्चा की और सर्वसम्मति से उन्हें पारित किया।


प्रतिनिधियों ने संगठन के विस्तार, निरंतर सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन और सामाजिक-सांस्कृतिक घटनाओं पर जलेस की स्पष्ट एवं सक्रिय प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर बल दिया।

नई राज्य समिति का गठन

सर्वसम्मति से गठित नई राज्य समिति में कामेश्वर पांडेय अध्यक्ष, डॉ. सुखनंदन सिंह नंदन (रायपुर) और भास्कर चौधरी (कोरबा) उपाध्यक्ष, पूर्णचंद्र रथ राज्य सचिव, राकेश बम्बोर्डे, अजय चंद्रवंशी और नूतनलाल साहू उप सचिव, मुमताज कोषाध्यक्ष बनाए गए। कार्यकारिणी में शेखर नाग, शिज्जू शकूर, समयलाल विवेक और सोनिया नायडू शामिल किए गए। एक उपाध्यक्ष पद महिला साथी के लिए रिक्त रखा गया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

सम्मेलन के दोनों सत्रों में शेखर नाग और वर्षा बोपचे द्वारा क्रांतिकारी जनगीतों की प्रस्तुति दी गई। वहीं दूसरे सत्र में हबीब तनवीर के ‘नया थियेटर’ समूह से जुड़े कलाकार अमर सिंह गंधर्व की गायकी ने श्रोताओं को खासा प्रभावित किया।

बड़ी संख्या में साहित्यकारों की भागीदारी

सम्मेलन में निसार अली, दिवाकर मुक्तिबोध, आसिफ इकबाल, रजत कृष्ण, संजय पराते, डॉ. आलोक वर्मा, ऋचा रथ, लक्ष्मीनारायण कुंभकार, दिलीप कुमार साहू, डॉ. गणेश कौशिक, एल. रुद्रमूर्ति, प्रेम मुंडेजा, भागीरथ प्रकाश वर्मा, वीरेंद्र सरल सहित अनेक वरिष्ठ लेखक, पत्रकार और संस्कृतिकर्मी शामिल हुए।

सम्मेलन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि मौजूदा दौर में साहित्य और संस्कृति की भूमिका केवल सृजन तक सीमित नहीं, बल्कि जनवादी मूल्यों की रक्षा और सांप्रदायिक फासीवाद के खिलाफ संगठित प्रतिरोध खड़ा करना भी है।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button