Tuesday, February 10, 2026
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उधमपुर में मानवता की मिसाल: मौलाना अरशद मदनी ने बाढ़ पीड़ितों को सौंपे 15 नए घर, बोले—धर्म नहीं, इंसानियत सबसे ऊपर

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में बाढ़ से प्रभावित परिवारों को राहत और सम्मान की नई छत सौंपी। पहले चरण में 15 नव-निर्मित मकानों की चाबियां पीड़ितों को दी गईं, जिनमें 7 विधवाएं भी शामिल हैं। ये मकान जमीयत उलेमा राजस्थान के सहयोग से बनाए गए हैं।

चाबियां मिलते ही पीड़ित परिवारों की आंखें नम हो गईं। भावुक लोगों ने कहा,
“सबने दिलासा दिया, लेकिन ज़मीन पर काम जमीयत उलमा-ए-हिंद ने ही किया।”
कई पीड़ितों ने मौलाना मदनी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि उन्होंने उनके दर्द को महसूस किया और मुश्किल वक्त में उनका सहारा बने।

“मुसीबत धर्म देखकर नहीं आती”

इस मौके पर मौलाना अरशद मदनी ने साफ शब्दों में कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद बिना किसी धार्मिक भेदभाव के मानवता की सेवा कर रही है।
उन्होंने कहा, “कोई भी मुसीबत यह पूछकर नहीं आती कि कौन हिंदू है और कौन मुसलमान। इंसानियत ही हमारा मजहब है।”

उन्होंने दोहराया कि “कश्मीर हमारा है और कश्मीरी भी हमारे हैं” और कश्मीरियों के दिल जीतने की जरूरत पर जोर दिया। पहलगाम की घटना के बाद कश्मीरी जनता द्वारा दिखाए गए भाईचारे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आम कश्मीरी हमेशा अमन और मोहब्बत के साथ खड़ा रहा है।

नफरत की राजनीति पर तीखा हमला

मौलाना मदनी ने देश में बढ़ती सांप्रदायिकता और नफरत की राजनीति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने हिंदू राष्ट्र के विचार पर निशाना साधते हुए कहा, “नफरत के सौदागरों और हिंदू राष्ट्र का सपना देखने वालों को नेपाल से सबक लेना चाहिए। लोकतंत्र और संविधान ही देश की तरक्की की असली नींव हैं।”

उन्होंने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में कश्मीरियों के साथ हुई भेदभाव की घटनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि नफरत का जवाब सिर्फ मोहब्बत से ही दिया जा सकता है।

संविधान और सेक्युलरिज़्म की रक्षा का संकल्प

अपने संबोधन के अंत में मौलाना मदनी ने कहा कि सांप्रदायिक ताकतें इस्लाम और मुसलमानों को मिटाने का सपना देख रही हैं, लेकिन यह सपना कभी पूरा नहीं होगा।
उन्होंने भरोसा जताया कि एक दिन ज़ुल्म का अंत होगा और देश फिर से प्यार, इंसाफ और भाईचारे के रास्ते पर आगे बढ़ेगा।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि धर्म के नाम पर लोगों को बांटना, देश को बांटने के बराबर है और जमीयत उलमा-ए-हिंद संविधान व धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष करती रहेगी।

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