कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर संसद में विपक्ष की आवाज दबाने और देश के स्वतंत्रता सेनानियों व महान नेताओं का अपमान करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जानबूझकर यह रणनीति अपनाई है कि न तो लोकसभा और न ही राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने दिया जाए।
खरगे ने कहा कि देश के लिए कुर्बानी देने वाले, अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले और जेल जाने वाले महान नेताओं के खिलाफ सदन में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। “एक व्यक्ति को माइक दिया जाता है, वह खुलेआम गालियां देता है और सरकार चुप्पी साधे रहती है। क्या कभी भाजपा ने इसकी निंदा की?” — यह सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इसी कारण विपक्षी दलों को वॉकआउट और प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।
“जो ट्रंप कहते हैं, मोदी वही करते हैं”
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के दबाव में काम करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ की गई ट्रेड डील में किसानों के हितों की बलि दे दी गई।
“जो ट्रंप कहते हैं, मोदी वही करते हैं। सरकार ने घुटने टेक दिए हैं,” — खरगे ने कहा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष प्रधानमंत्री का भाषण सुनना चाहता था, लेकिन चार दिनों से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जा रहा है। सभी विपक्षी दलों ने यह तय किया था कि अगर राहुल गांधी को अपनी बात रखने दी जाती, तो वे प्रधानमंत्री के जवाब को जरूर सुनते।
“हम हंगामा नहीं कर रहे थे”
खरगे ने कहा कि विपक्ष संसद में लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, युवाओं के रोजगार और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बात रखना चाहता था।
“हम कोई हंगामा नहीं कर रहे थे, हम केवल अपनी बात रखना चाहते थे। अगर मेरी बात सुनी जाती तो यह पूरा विवाद खत्म हो सकता था,” — उन्होंने कहा।
“ऐसा पहले कभी नहीं हुआ”
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी करोड़ों भारतीयों की आवाज हैं, लेकिन उन्हें संसद में बोलने से रोका जा रहा है।
पार्टी ने इसे संसद और लोकतंत्र का अपमान बताया और कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।
इसी के विरोध में राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान वॉकआउट कर सरकार के “लोकतंत्र विरोधी रवैये” के खिलाफ कड़ा संदेश दिया।














