अयोध्या, 29 जनवरी 2026। अयोध्या जिला कारागार से बुधवार रात/प्रभात के बीच दो बंदी — गोलू अग्रहरि (उर्फ सूरज) और शेर अली — बैरक की दीवार तोड़कर फरार हो गए। घटना ने जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया और उच्च स्तरीय जांच व सख्त कार्रवाई का रास्ता खोल दिया गया है।
घटना — क्या और कब हुआ
पुलिस व जेल सूत्रों के मुताबिक, दोनों कैदियों की अनुपस्थिति का पता सुबह की रूटीन हेडकाउंट के दौरान चला। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों ने विशेष सुरक्षा वार्ड (Special Security Ward) की बैरक की दीवार/रोशनदान तोड़कर बाहर निकलने का रास्ता बनाया। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि कैदियों ने बर्तन के औज़ार, कम्बल/मफलर और अन्य साधनों का इस्तेमाल कर ढांचा नुकसान कर बाउंड्री वॉल तक पहुंचा और वहां से बाहर निकलने में सफल रहे।
फरार कैदियों की पहचान और आपराधिक पृष्ठभूमि
गोलू अग्रहरि (उर्फ सूरज) — मुसाफिरखाना, अमेठी निवासी; दुष्कर्म के केस में 14 सितंबर 2025 से जेल में बंद था। रिपोर्टों में यह भी दर्ज है कि उस पर हत्या, हत्या के प्रयास, चोरी और छेड़खानी जैसे अन्य गंभीर मामले भी दर्ज हैं।
शेर अली — रौदी, सुल्तानपुर निवासी; डकैती के केस में 28 नवंबर 2024 से जेल में था; उस पर भी हत्या, हत्या के प्रयास व अन्य आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं।
दोनों का अपराध रेकॉर्ड गंभीर है और यही वजह है कि उनकी फरारी को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
तुरन्त की कार्रवाई — कौन-कौन निलंबित हुआ
अयोध्या रेंज के DIG (Prisons) शैलेंद्र कुमार मैत्रेय की प्रारंभिक जांच व डीजी जेल पी.सी. मीणा की रिपोर्ट के आधार पर जेल प्रशासन ने वरिष्ठ अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर तथा अन्य वार्डरों सहित कुल 10 कर्मियों को निलंबित कर दिया है। निलंबितों में वरिष्ठ अधीक्षक उदय प्रताप मिश्र, जेलर जितेंद्र कुमार यादव, डिप्टी जेलर मयंक त्रिपाठी, हेड जेल वार्डर हरिहर प्रसाद, त्रिपुरारी मिश्र, तथा जेल वार्डर सुरेश कुमार दुबे, जयप्रकाश यादव, सुनील कुमार, रमेश सहानी, रवि यादव और मनोज शामिल बताए गए हैं। इनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
प्रारम्भिक जांच में सुरक्षा चूक, निगरानी में लापरवाही और बैरक में रख-रखाव की कमी को दोष के तौर पर पहचाना गया है। आगे की विस्तृत विभागीय जांच पूरी होने पर कड़ा दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।
खोज एवं तलाशी — पुलिस क्या कर रही है
पुलिस और जेल विभाग ने संयुक्त रूप से बड़ी तलाशी शुरू कर दी है; स्थानीय और पड़ोसी जिलों में कई टीमों को तैनात किया गया है। कुछ रिपोर्टों में तीन अलग-अलग पुलिस टीमों और स्पेशल सर्च पार्टियों का जिक्र है जो आसपास के क्षेत्रों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और संभावित भागने के मार्गों की जांच कर रही हैं।
सीसीटीवी और जेल की निगरानी फुटेज जुटाई जा रही हैं; आसपास के कैमरों के फुटेज्स भी खंगाले जा रहे हैं ताकि फरारी के पूरे रास्ते का अनुमान लगाया जा सके।
प्रारम्भिक जांच में सामने आई तकनिकी और प्रशासनिक कमियाँ
प्रारम्भिक रिपोर्टों में जिन खामियों की ओर इशारा हुआ है उनमें मुख्य हैं:
1.बैरक व उसके रोशनदान/दीवार में संरचनात्मक कमजोरियाँ/मर्ममहत्व की अनदेखी।
2.रूटीन हेडकाउंट और वार्डर-ड्यूटी में निगरानी के अंतराल।
3.कुछ सीसीटीवी कैमरों की स्थिति या रिकॉर्डिंग की जाँच की आवश्यकता — यदि कैमरे काम कर रहे भी थे तो निगरानी-विश्लेषण में देरी रही।
ये बिंदु स्पष्ट करते हैं कि न केवल रोज़मर्रा के परिचालन में चूक हुई, बल्कि भौतिक संरचना और रखरखाव पर भी ध्यान नहीं दिया गया — जो गंभीर सुरक्षा दोष का संकेत है।
विभागीय कार्रवाई — आगे क्या होगा
जिला प्रशासन ने विस्तृत विभागीय जांच (departmental enquiry) का आदेश दे दिया है। जांच पूरी होने पर दोष सिद्ध होने पर सेवा-निरस्ती, पैनल्टी, स्थानांतरण या अन्य दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
साथ ही पुलिस उच्चाधिकारियों ने कहा है कि यदि फरार कैदियों के सहयोगियों/सहयोग की कोई संदिग्धता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी अलग से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव और सवाल
अयोध्या जैसे संवेदनशील जिले में इस तरह की सुरक्षा चूक स्थानीय प्रशासन की निष्पादन क्षमता पर सवाल खड़े करती है। एक पहलू यह भी है कि हाल के महीनों में प्रदेश में जेल सुरक्षा से जुड़े अन्य घटनाक्रम भी सामने आए हैं, जिससे समग्र निगरानी व्यवस्था और संसाधन सुनिश्चित करने की आवश्यकता और बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जेलों के रख-रखाव, नियमित ऑडिट और सीसीटीवी/गेट कंट्रोल व्यवस्था का समय पर परीक्षण आवश्यक है।
जनता व अधिकारियों की प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासी और पीड़ित पक्षों में रोष दिखा है। जिला प्रशासन व पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि हर सम्भव साधन लगाकर फरारियों की त्वरित गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी और दोषियों के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी। उच्च अधिकारियों का कहना है कि दोषों की पहचान के बाद संबंधित कानून व सेवानीति के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अयोध्या जेल से दो निहित आरोपियों की भागरात्रि न केवल एक स्थानीय सुरक्षा घटना है, बल्कि यह जेल प्रबंधन, निगरानी प्रणाली और संबंधित कर्मियों की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। प्रारम्भिक निलंबन व दर्ज कार्रवाई इस कड़ी का पहला कदम हैं; अब सार्वजनिक और न्यायिक अपेक्षा होगी कि विस्तृत विभागीय व पुलिसिया जांच त्वरित, पारदर्शी और परिणाममुखी हो ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।














