महाराष्ट्र में हुए विमान हादसे के बाद बारामती एयरपोर्ट गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। जिस एयरपोर्ट पर VVIP और बड़े नेताओं के विमान उतरते हैं, वह न तो एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के अंतर्गत आता है और न ही वहां पूर्ण एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) व्यवस्था मौजूद है। DGCA खुद इस एयरपोर्ट को ‘अनकंट्रोल्ड एयरोड्रोम’ मानता है।
हैरानी की बात यह है कि यहां ATC की जिम्मेदारी कई बार फ्लाइट ट्रेनिंग ले रहे छात्र या इंस्ट्रक्टर संभालते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि महाराष्ट्र का यह अहम एयरपोर्ट आखिर किसके भरोसे संचालित हो रहा है।
पुणे से 95 किमी दूर स्थित है बारामती एयरपोर्ट
बारामती एयरपोर्ट पुणे से करीब 95 किलोमीटर दूर स्थित है। एयरपोर्ट परिसर में दो फ्लाइट ट्रेनिंग एकेडमी संचालित होती हैं—
रेडबर्ड फ्लाइट ट्रेनिंग एकेडमी
एकेडमी ऑफ कार्वर एविएशन प्राइवेट लिमिटेड
इस एयरफील्ड से उड़ान भरने वाले विमानों के साथ पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, हालांकि अब तक किसी घटना में जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था।
कौन करता है एयरपोर्ट का प्रबंधन?
महाराष्ट्र एयरपोर्ट्स डेवलपमेंट कंपनी (MADC) के अनुसार, बारामती राज्य के 15 बिना लाइसेंस वाले घरेलू एयरपोर्ट्स में से एक है। यह एयरपोर्ट महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MIDC) के अधीन है और इसका संचालन बारामती एयरपोर्ट लिमिटेड (BAL) द्वारा किया जाता है।
रनवे तो लंबा, लेकिन सुविधाएं सीमित
बारामती एयरपोर्ट पर 7710 फीट लंबा रनवे मौजूद है, जो चार्टर विमानों और लियरजेट जैसे एयरक्राफ्ट की लैंडिंग के लिए पर्याप्त माना जाता है। एयरफील्ड मैनेजर शिवाजी तावरे के अनुसार, यह हवाई पट्टी 1990 के दशक में बनाई गई थी और लगभग 450 एकड़ में फैली हुई है।
उन्होंने बताया कि यहां हर महीने 6 से 7 चार्टर फ्लाइट्स उतरती हैं, जिनमें अधिकांश नेताओं की होती हैं। 2009 में एयरपोर्ट को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सब्सिडियरी को लीज पर दिया गया था, लेकिन विकास न होने और उड़ानों की कमी के कारण MIDC ने 2025 में फिर से इसका नियंत्रण संभाल लिया।
इमारत के नाम पर सिर्फ दो केबिन और एक कमरा
एयरपोर्ट की बिल्डिंग में केवल दो केबिन और एक कमरा है। हादसे वाले दिन अधिकारियों से ज्यादा मीडियाकर्मी मौजूद थे। पूरे एयरफील्ड पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और दिनभर मंत्री और अधिकारी घटनास्थल का दौरा करते रहे।
ट्रेनिंग स्कूल के भरोसे ATC
बारामती एयरपोर्ट का इस्तेमाल मुख्य रूप से फ्लाइट ट्रेनिंग के लिए किया जाता है। यहां केवल एक फ्लाइंग स्कूल द्वारा संचालित बेसिक ATC सेटअप है। DGCA के अनुसार, यहां ATC सपोर्ट या तो ट्रेनिंग ले रहे छात्र देते हैं या इंस्ट्रक्टर।
हादसे वाले दिन VVIP लैंडिंग के कारण ATC की जिम्मेदारी कार्वर एविएशन के एक फ्लाइट इंस्ट्रक्टर ने संभाली थी।
अनकंट्रोल्ड एयरोड्रोम की कैटेगरी में शामिल
DGCA के अनुसार, दुर्घटना के समय विजिबिलिटी करीब 3 किलोमीटर थी, जबकि सुरक्षित लैंडिंग के लिए 5 किलोमीटर की आवश्यकता होती है। इसी वजह से पायलट ने पहली लैंडिंग रद्द कर दी थी।
बारामती एयरपोर्ट को अनकंट्रोल्ड एयरोड्रोम (Category A) में रखा गया है, जहां नियमित ATC सेवाएं उपलब्ध नहीं होतीं और रडार या ILS जैसी उन्नत सुविधाएं नहीं होतीं।
हादसे के बाद वायुसेना की तैनाती
हादसे के बाद भारतीय वायुसेना ने प्रशासन के अनुरोध पर एक समर्पित टीम तैनात की है, जो सुरक्षित हवाई संचालन के लिए आवश्यक ATC और मौसम संबंधी सेवाएं प्रदान कर रही है। वायुसेना ने सोशल मीडिया पोस्ट में इसकी पुष्टि की है।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
सेवानिवृत्त पायलट एहसान खालिद के अनुसार, रनवे इस दुर्घटना का कारण नहीं लगता। उन्होंने कहा कि यदि एयरपोर्ट पर ILS या अन्य इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम मौजूद होते, तो कम दृश्यता की स्थिति में पायलट को बेहतर मार्गदर्शन मिल सकता था और हादसे से बचा जा सकता था।














