नई दिल्ली — 2025 में पाकिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ चली ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारतीय पक्ष का प्रमुख चेहरा रहने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को 2026 की गणतंत्र दिवस सम्मान सूची में उच्च श्रेणी के विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है। यह पदक उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है और कर्नल कुरैशी की शौर्य-युक्त और रणनीतिक भूमिका की स्वीकृति है।
पुरस्कार और आधिकारिक सूची
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर कुल 70 सशस्त्र बलों के कर्मियों को वीरता पुरस्कार स्वीकृत किए — जिनमें छह मरणोपरांत शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सशस्त्र बलों व अन्य कर्मियों के लिए कुल 301 सैन्य पदक भी मंजूर किए गए हैं, जिनमें प्रमुख श्रेणियाँ इस प्रकार हैं: 30 परम विशिष्ट सेवा पदक, 4 उत्तम युद्ध सेवा पदक, 56 अति विशिष्ट सेवा पदक, 9 युद्ध सेवा पदक, 43 सेना पदक (विशिष्ट), 8 नौसेना पदक (विशिष्ट), 14 वायु सेना पदक (प्रतिष्ठित) तथा 135 विशिष्ट सेवा पदक। कर्नल सोफिया कुरैशी को इन्हीं कड़ी में विशिष्ट सेवा पदक से नवाजा गया है।
कर्नल सोफिया कुरैशी — पृष्ठभूमि और करियर
कर्नल कुरैशी का जन्म 1974 में गुजरात-के वडोदरा में एक सैनिक परिवार में हुआ। उन्होंने 1997 में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय से बायोकेमिस्ट्री में परास्नातक डिग्री प्राप्त की। परिवार से जुड़ी पारंपरिक सैन्य पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने पिछले वर्ष यह भी बताया कि उनके दादा सेना में धार्मिक शिक्षक रहे थे।
एक प्रशिक्षित अधिकारी के रूप में उन्होंने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) से कमीशन प्राप्त किया। ओटीए में उन्हें रणनीतिक योजना और सिग्नल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन के लिए जाना गया। उनके काम करने का तरीका शांत, केंद्रित और संप्रेषण में सटीक माना जाता है — विशेषकर प्रेस ब्रीफिंग और मीडिया-अंतरक्रियाओं में।
मुख्य उपलब्धियाँ और कार्य-भूमि
ऑपरेशन सिंदूर (2025): पाकिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ अभियान के दौरान भारतीय पक्ष का एक प्रमुख सार्वजनिक चेहरा रहीं — उनके नेतृत्व और संचार ने ऑपरेशन के विवरण को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्पष्ट रूप से पेश करने में मदद की।
प्रेस-ब्रिफिंग्स: ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश सचिव के प्रारम्भिक बयान के बाद कर्नल कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने संयुक्त रूप से हमलों के तरीकों और अभियानों के संचालन का खुलासा किया। उनके संयमित और सटीक संचार शैली को खूब सराहा गया।
बहुराष्ट्रीय नेतृत्व (2016): कर्नल कुरैशी 2016 में बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं। ‘एक्सरसाइज फोर्स 18’ में उन्होंने मानवीय खदान कार्रवाई (HMA) पर केन्द्रित 40 सदस्यीय टीम का नेतृत्व किया।
ऑपरेशन पराक्रम और सीमा गतिविधियाँ: उनके करियर में ऑपरेशन पराक्रम जैसी सीमावर्ती अभियानों में भी अहम भूमिका रही; पारंपरिक सुरक्षा-ऑपरेशनों में उनकी सेवा के लिए उन्हें जीओसी-इन-सी से प्रशस्ति पत्र दिया गया।
मानवतावादी और शान्ति प्रयास: पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ राहत कार्रवाइयों में उनकी नेतृत्व क्षमता और महत्वपूर्ण सञ्चार-दक्षता की प्रशंसा हुई। इसके अलावा उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा अभियानों के तहत 2006 से लगभग छह वर्षों तक कांगो में सेवाएँ दीं — जहाँ संघर्ष क्षेत्र में शान्ति स्थापित करने के प्रयास उनके लिए गर्व का विषय रहे। जैसा कि कर्नल कुरैशी ने स्वयं कहा है:
“संघर्ष क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के प्रयास मेरे लिए गर्व का क्षण रहे हैं।”
क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत सम्मान है?
यह पुरस्कार केवल कर्नल कुरैशी की व्यक्तिगत कार्यकुशलता का ही नहीं, बल्कि उन ऑपरेशनल टीमों, संप्रेषण इकाइयों और इंटेलिजेंस सहयोगियों की भी मान्यता है जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर जैसे संवेदनशील अभियानों को सफल बनाने में योगदान दिया। उनके शांत और स्पष्ट संप्रेषण ने घरेलू और विदेशी दोनों मंचों पर ऑपरेशन की वैधता और सफलता को स्थापित करने में भूमिका निभाई।
कर्नल सोफिया कुरैशी को दिए गए विशिष्ट सेवा पदक से न केवल उनकी सैन्य-कुशलता और ऑपरेशनल नेतृत्व की सराहना हुई है, बल्कि यह महिलाओं के सैन्य नेतृत्व और आधुनिक असाइनमेंट में उनकी बढ़ती उपस्थिति का भी प्रतीक है। गणतंत्र दिवस-2026 की इस मान्यता के साथ उनका नाम उन अधिकारियों में जुड़ गया है जिनकी सेवाएँ राष्ट्र की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका की मजबूती में माने जाएँगी।














