तड़केश्वर गांव में ‘गाय पाक पानी सन्याल योजना’ बनी ‘गायब पाक जवाबदेही योजना’
“जिस टंकी का मकसद 33 गांवों की प्यास बुझाना था, उसने ट्रायल में ही सिस्टम की प्यास—कमिशन, करप्शन और लापरवाही—सब उजागर कर दी। 9 लाख लीटर पानी नहीं भरा गया था, बल्कि जनता के भरोसे को भरकर देखा गया था… जो ढांचा ढहते ही बह गया।”
सूरत जिले के मांडवी तालुका के तड़केश्वर गांव में तड़के ही ऐसा “विकास” हुआ कि पूरी योजना जमीन पर आ गिरी—शाब्दिक अर्थों में। ‘गाय पाक पानी सन्याल योजना’ के तहत बनी 11 लाख लीटर क्षमता की टंकी ट्रायल के दौरान ही धराशायी हो गई। नतीजा—एक महिला समेत तीन मजदूर घायल और 21 करोड़ रुपए की योजना सवालों के मलबे में दबी।
बताया जा रहा है कि टंकी 15 मीटर ऊंची थी, लेकिन उसकी नींव शायद ईमानदारी से सिर्फ 15 इंच गहरी थी। जैसे ही टेस्टिंग के नाम पर 9 लाख लीटर पानी भरा गया, टंकी ने सिस्टम की तरह जवाब दे दिया—ढहकर।
सीमेंट ऐसा कि परतें नहीं, राज उखड़ रहे हैं
मलबे का रियलिटी चेक हुआ तो सीमेंट की परतें ऐसे उखड़ रही थीं जैसे फाइलों से जवाबदेही उखड़ जाती है। गांव वालों का आरोप है कि लोहे में मिलावट और सीमेंट में समझौता किया गया—क्योंकि यहां मजबूत सिर्फ बिल थे, स्ट्रक्चर नहीं।
अफसर बोले: “टैंक अंडर ट्रायल था”
देर से पहुंचे एग्जीक्यूटिव इंजीनियर जय चौधरी ने भरोसा दिलाया कि SVNIT की टीम जांच करेगी। गांव वालों का सवाल सीधा है—
“अगर उद्घाटन हो जाता और तब गिरती, तो बयान ‘अंडर ट्रायल’ का होता या ‘अंडर फाइल’ का?”
एक्शन भी हुआ, सवाल भी बाकी
प्रशासन ने गंभीरता दिखाते हुए संबंधित इंजीनियरों को सस्पेंड किया, कॉन्ट्रैक्टर के पेमेंट रोके और PMC व एजेंसियों को नोटिस भेजे। GERI और विजिलेंस सैंपल उठा रही हैं—यानी अब मटेरियल के साथ-साथ नियत की भी जांच होगी।
जनता पूछ रही है—टंकी गिरी है या सिस्टम?
गांव वालों की मांग साफ है:
सिर्फ जांच नहीं, क्रिमिनल केस दर्ज हों। क्योंकि 21 करोड़ की रकम सिर्फ कंक्रीट में नहीं डाली गई थी—वो जनता के सपनों की भी थी।
अंतिम व्यंग्यात्मक पंक्ति:
इस हादसे में पानी की टंकी नहीं गिरी—
यह उस सिस्टम का ट्रायल फेल था, जो हर बार उद्घाटन पास करता है और जवाबदेही में फेल हो जाता है।














