Friday, January 23, 2026
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अंधेरे में तुस्याना! नॉलेज पार्क–5 की बंद स्ट्रीट लाइटें बनीं खतरे की घंटी, प्राधिकरण–विद्युत कंपनी की खींचतान से जनता बेहाल

ग्रेटर नोएडा वेस्ट के नॉलेज पार्क–5 (तुस्याना) क्षेत्र में सड़क प्रकाश व्यवस्था का लंबे समय से बंद रहना अब केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि नागरिक सुरक्षा पर सीधा खतरा बन चुका है। घनी आबादी वाले इस इलाके में रात ढलते ही सड़कों पर घना अंधेरा छा जाता है, जिससे महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और राहगीरों में भय का माहौल बना रहता है।

गौतम बुद्ध नगर विकास समिति के अनुसार, क्षेत्र में रहने वाली लगभग 6 प्रतिशत आबादी लंबे समय से इस समस्या से जूझ रही है। लगातार पत्राचार और IGRS पर शिकायतें दर्ज कराए जाने के बाद प्राधिकरण ने भले ही कार्य शुरू किया, लेकिन वह भी आधे रास्ते में ही दम तोड़ चुका है। नतीजा—लाइटें लगी हैं, खंभे खड़े हैं, लेकिन रोशनी नदारद है।अंधेरे में तुस्याना! नॉलेज पार्क–5 की बंद स्ट्रीट लाइटें बनीं खतरे की घंटी, प्राधिकरण–विद्युत कंपनी की खींचतान से जनता बेहाल

समिति ने बताया कि 19 दिसंबर 2025 को सड़क प्रकाश व्यवस्था के लिए खंभे और लाइटें स्थापित कर दी गई थीं, लेकिन आज तक विद्युत संयोजन उपलब्ध नहीं कराया गया। जब इस संबंध में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से जानकारी ली गई, तो उन्होंने अपनी औपचारिकताएं पूरी होने की बात कहकर देरी का ठीकरा विद्युत कंपनी पर फोड़ दिया। दूसरी ओर, विद्युत कंपनी की ओर से कोई ठोस जवाब या समय-सीमा सामने नहीं आई।

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दो विभाग जिम्मेदारी तय करने में उलझे हैं, तो जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? शहर में पहले से ही बढ़ती आपराधिक घटनाओं के बीच अंधेरे में डूबा यह इलाका असामाजिक तत्वों के लिए खुला निमंत्रण बनता जा रहा है। साथ ही, दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बढ़ रही है।

गौतम बुद्ध नगर विकास समिति की अध्यक्ष रश्मि पांडेय ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सड़क प्रकाश व्यवस्था कोई सुविधा नहीं, बल्कि नागरिकों का बुनियादी अधिकार और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। उन्होंने मांग की कि विद्युत संयोजन तत्काल उपलब्ध कराया जाए और लाइटों को अविलंब चालू किया जाए।

यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्मार्ट सिटी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के दावों के बीच नॉलेज पार्क–5 जैसे क्षेत्र आज भी अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। प्राधिकरण और विद्युत कंपनी के बीच चल रही जिम्मेदारी की रस्साकशी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या सिस्टम में जवाबदेही नाम की कोई चीज़ बची है? अगर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह अंधेरा केवल सड़कों पर नहीं, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी स्थायी दाग बन जाएगा।

समिति ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो इस गंभीर जनहित के मुद्दे को उच्च प्रशासनिक स्तर और जनमंचों पर मजबूती से उठाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।

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VIKAS TRIPATHI
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