Friday, January 23, 2026
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धरने पर शंकराचार्य, फोन पर अखिलेश—सहयोग या सियासत? 2015 की यादों ने बहस को और तेज किया

प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के संगम स्नान को लेकर उपजा विवाद अब सियासी रंग लेता दिख रहा है। सोमवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने धरने पर बैठे शंकराचार्य से फोन पर बातचीत कर उनका हाल जाना और उनके साथ खड़े होने की बात कही। इस बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि वह अपनी लड़ाई “अभिमन्यु की तरह” लड़ रहे हैं और आरोप लगाया कि एक हिंदू बच्चे को गंगा स्नान से वंचित कर दिया गया।

अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से जल्द मुलाकात का भी आश्वासन दिया है। यह पूरा घटनाक्रम उस नोंकझोंक के बाद सामने आया है, जो रविवार को संगम तट तक पालकी ले जाने को लेकर शंकराचार्य के अनुयायियों और पुलिस-प्रशासन के बीच हुई थी। इससे आहत होकर शंकराचार्य अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर उनके साथ यह व्यवहार किया गया ताकि “सबक सिखाया जा सके।” उन्होंने कहा कि अन्य संतों को VIP व्यवस्था के साथ स्नान कराया गया, जबकि उन्हें रोका गया—यह प्रशासन का दोहरा चरित्र है। उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या के दिन उनकी हत्या की साजिश रची गई।

भक्तों का कहना है कि पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी और लाठीचार्ज किया, जबकि पुलिस का पक्ष है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। विवाद के चलते शंकराचार्य ने फिलहाल संगम स्नान से इनकार करते हुए कहा है कि जब तक उन्हें पूरे प्रोटोकॉल के तहत स्नान नहीं कराया जाएगा, वे आगे नहीं बढ़ेंगे।

इसी बीच, अखिलेश यादव के फोन कॉल को लेकर राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं—क्या यह वास्तविक सहयोग की पेशकश है या फिर एक संवेदनशील धार्मिक मुद्दे को राजनीतिक धार देने की कोशिश? बहस इसलिए भी तेज है क्योंकि विरोधी दल 2015 का संदर्भ उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब 2015 में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब भी इसी शंकराचार्य से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के आरोप लगे थे। हालांकि, उस समय की परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को लेकर अलग-अलग दावे हैं और यह मुद्दा आज भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के दायरे में ही है।

कुल मिलाकर, संगम स्नान से शुरू हुआ प्रशासनिक विवाद अब धार्मिक आस्था, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक मंशा—तीनों के संगम पर खड़ा दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन और सरकार इस गतिरोध को कैसे सुलझाते हैं, और क्या यह मामला समाधान की ओर बढ़ेगा या सियासी खींचतान और तेज होगी।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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