Friday, January 23, 2026
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नोएडा हादसा: एक मौत, एक बर्खास्तगी और सिस्टम की पूरी बरी होने की कहानी

नोएडा सेक्टर-150 स्थित एक निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में पानी में डूबकर एक इंजीनियर की मौत हो जाती है। यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी होनी चाहिए थी, लेकिन जो हुआ वह जवाबदेही तय करने के बजाय बलि का बकरा ढूंढने की कवायद बनकर रह गया।

नोएडा प्राधिकरण के सीईओ ने कार्रवाई के नाम पर ट्रैफिक सेल के एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त कर दिया और कुछ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए। प्रेस नोट जारी हुआ, संवेदनाएं प्रकट की गईं और संकेत दे दिया गया कि प्रशासन ने अपना काम कर दिया है।

लेकिन सवाल यह है—
क्या वाकई काम हो गया है, या सिर्फ मामला “मैनेज” किया गया है?


बेसमेंट में मौत, लेकिन जिम्मेदारी ट्रैफिक सेल की?

हादसा किसी सड़क पर नहीं, किसी चौराहे पर नहीं, बल्कि प्लॉट के भीतर बने बेसमेंट में हुआ, जहां लंबे समय से पानी भरा हुआ था। ऐसे में सबसे असहज सवाल यह उठता है कि इस मौत की जिम्मेदारी ट्रैफिक सेल पर कैसे डाल दी गई।

क्या अब ट्रैफिक विभाग का काम बेसमेंट की निगरानी करना भी है?
अगर नहीं, तो फिर वर्क सर्कल, सिविल विंग और इंजीनियरिंग विभाग किस लिए मौजूद हैं?


महीनों से भरा पानी, फिर भी सब अनजान?

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक बेसमेंट में पानी एक-दो दिन का नहीं, बल्कि काफी समय से जमा था। इसके बावजूद किसी विभाग ने न तो साइट को असुरक्षित घोषित किया, न ही काम रुकवाया।

यह लापरवाही नहीं तो और क्या है?
या फिर सवाल यह है कि क्या सब कुछ देखा गया, लेकिन देखने की कीमत तय थी?


वर्क सर्कल और ज़ोनल इंजीनियर कटघरे में

वर्क सर्कल और ज़ोनल इंजीनियरिंग व्यवस्था की भूमिका पर अब तक कोई ठोस जवाब सामने नहीं आया है। यदि निरीक्षण हुआ ही नहीं, तो यह गंभीर अक्षमता है। और यदि निरीक्षण हुआ और फिर भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है।


ग्रुप हाउसिंग विभाग: सिर्फ अलॉटमेंट एजेंसी?

ग्रुप हाउसिंग विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। क्या उनका दायित्व केवल प्लॉट अलॉट करने तक सीमित है? क्या निर्माण नियमों, सुरक्षा मानकों और साइट की स्थिति की कोई जिम्मेदारी उनकी नहीं?

अगर जवाब ‘नहीं’ है, तो भविष्य में किसी भी हादसे पर जिम्मेदारी तय करने का औचित्य ही क्या रह जाता है?

बिल्डर पर कार्रवाई या औपचारिकता?

प्राधिकरण ने संबंधित बिल्डर से रिपोर्ट तलब की है, लेकिन नोएडा में इससे पहले भी कई रिपोर्टें तलब की जा चुकी हैं, जिनका अंजाम फाइलों में दफन होकर रह गया।

अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि:

बिल्डर पर एफआईआर होगी या नहीं

साइट सील की जाएगी या नहीं

या यह मामला भी सिर्फ कागज़ी कार्रवाई बनकर रह जाएगा


एक जूनियर इंजीनियर दोषी, बाकी पूरा सिस्टम पाक-साफ?

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे खतरनाक संदेश यह जा रहा है कि सिस्टम कभी दोषी नहीं होता। जिम्मेदारी हमेशा सबसे नीचे खड़े कर्मचारी पर डाल दी जाती है और ऊपर बैठे अधिकारी, विभाग और बिल्डर सुरक्षित निकल जाते हैं।

यह न्याय नहीं है।
यह प्रशासनिक आत्मरक्षा है।


कार्रवाई नहीं, लीपापोती

एक बर्खास्तगी, कुछ नोटिस और सख्त शब्द—यह सब न्याय नहीं, बल्कि जनता की नाराज़गी को ठंडा करने की कोशिश भर है।

जब तक हर संबंधित विभाग की भूमिका तय नहीं होगी और जवाबदेही ऊपर तक नहीं पहुंचेगी, तब तक ऐसी मौतें “दुर्घटना” कहलाती रहेंगी और फाइलों में हर बार यही लिखा जाएगा—

“आवश्यक कार्रवाई कर दी गई है।”

जबकि हकीकत यह होगी—
एक और जान चली गई,
और सिस्टम एक बार फिर बच निकला।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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