बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख प्रोफेसर मुहम्मद युनुस ने साफ़ कहा है कि अगर आवामी लीग (Awami League) अपने पिछले शासन के कथित दुरुपयोग/मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी माँगती है तो सरकार सुलह और पार्टी की चुनावी वापसी पर विचार कर सकती है। यह बयान चुनावी माहौल को पलट सकता है — जबकि उसी समय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान की अमेरिका/यूएई यात्रा और BNP के बड़े राजनैतिक कदमों ने स्थिति और जटिल कर दी है।
क्या कहा युनुस ने — ‘माफी और पश्चाताप’ शर्त
युनुस ने दोहराया है कि सच्ची सुलह तभी संभव है जब पूर्व शासन अपनी गलतियों/अपराधों को स्वीकार करे और सार्वजनिक रूप से पश्चाताप करे — वरना किसी व्यापक ‘ट्रुथ एंड रीकॉन्सिलिएशन’ प्रक्रिया की फिलहाल गुंजाइश नहीं। उन्होंने कहा कि माफी, स्वीकारोक्ति और सही माहौल आवश्यक हैं; तभी ही राजनीतिक वापसी पर विचार होगा। यह बयान खास है क्योंकि यह चुनावी प्रक्रिया के बीच आया है और पार्टी-लौट की शर्तें स्पष्ट कर रहा है।
NSA खलीलुर रहमान की विदेश यात्रा — क्या हुआ वार्तालाप में?
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान हाल ही में अमेरिका और यूएई की पाँच दिन की यात्रा से लौटे। वे वॉशिंगटन में स्टेट डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारियों — Allison Hooker और Paul Kapur से मिले। प्रेस-विवरण के अनुसार इन बैठकों में आगामी चुनाव, क्षेत्रीय मामलों, रोहिंज्या संकट, और द्विपक्षीय व्यापार/वीजा मुद्दे पर चर्चा हुई — और अमेरिका ने लोकतांत्रिक संक्रमण पर अपनी सहमति जताई। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि इन बैठकों में चुनाव में सभी दलों की भागीदारी की संभावनाएँ भी उठीं।
आवामी लीग को बैन — चुनावी मैदान से बाहर?
अंतरिम सरकार ने पहले ही आवामी लीग की गतिविधियों पर पाबंदी लगाई है और चुनाव आयोग ने पार्टी का पंजीकरण निलंबित किया हुआ है — जिसके चलते पार्टी फिलहाल 12 फ़रवरी 2026 के चुनाव में भाग नहीं ले सकेगी। (सरकार का कहना: पार्टी के खिलाफ गंभीर आरोप और आईसीटी/सुरक्षा मामलों की सुनवाई के चलते यह कदम आवश्यक है)। आवामी लीग ने इस कार्रवाई को विवादित और असंवैधानिक बताया है।
BNP का उठता सशक्तीकरण — तारिक रहमान की वापसी
दूसरी ओर BNP सक्रिय हो चुकी है — दिसंबर 2025 में तारिक रहमान की बांग्लादेश वापसी ने पार्टी को जन-आकर्षण और राजनीतिक ऊर्जा दी है। BNP अब चुनावी मोर्चे पर तेज़ी से सजे — और कई नेता खुले तौर पर जमात-ए-इस्लामी व अन्य पार्टियों के खिलाफ पोजिशन लेते दिख रहे हैं। अंतरिम राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि BNP की बढ़ती साख और जमात के क्लोज़ एलाइनमेंट ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं।
मानवाधिकार और अंतर्राष्ट्रीय दबाव — चिंताएँ बढ़ीं
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कुछ चिंतित नागरिकों ने चुनाव के पूर्व हिंसा और अल्पसंख्यक सुरक्षितता पर आशंकाएँ जताईं हैं। HRW सहित विद्वानों/समूहों ने स्वतंत्र, निष्पक्ष चुनाव और मानवाधिकार सुरक्षा पर अंतरिम प्रशासन को सतर्क किया है। अमेरिका और अन्य देशों ने बातचीत में लोकतांत्रिक संक्रमण पर अपनी रुचि जताई है, लेकिन अभी तक किसी ने सार्वजनिक तौर पर ‘समावेशी चुनाव’ की स्पष्ट माँग नहीं रखी है — जबकि भारत लगातार हर दल की हिस्सेदारी पर ज़ोर दे रहा है।
क्या चुनाव टल सकते हैं? (संभावनाएँ और परीक्षाएँ)
युनुस ने एक तरफ़ तो शर्तें रखीं हैं और दूसरी ओर चुनाव के 12 फ़रवरी के शेड्यूल की गारंटी भी दी है — “not a day before, not a day after” जैसा साफ़ इशारा कुछ स्रोतों में आया है। साथ ही विश्लेषक कहते हैं कि अगर आवामी लीग माफी के साथ सुलह का रास्ता अपनाए, तो सियासी समीकरण बदल सकते हैं और चुनाव की तिथि या अधिसूचना पर पुनर्विचार की संभावना बढ़ सकती है — लेकिन फिलहाल कोई आधिकारिक घोषित बदलाव नहीं हुआ है। सरकार का रुख अभी स्पष्ट: चुनाव निर्धारित तिथि पर ही कराना।
आप क्या देख सकते हैं — 3 संभावित परिदृश्य
1.आवामी लीग सार्वजनिक माफी दे दे — फिर सरकार सुलह की मेज़ पर बैठ सकती है; चुनाव की अधिसूचना बदली जा सकती है या शर्तों के साथ पार्टियों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है।
2.आवामी लीग मना करती है — चुनाव नियत समय पर होंगे; आवामी लीग बाहर रहने से विपक्ष का ढाँचा BNP–जमात/अन्य गठबंधनों के चारों ओर बन सकता है।
3.अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता/दबाव बढ़े — अमेरिका/क्षेत्रीय देश बैठकर समावेशी शर्तों पर असर डाल सकते हैं; पर अभी तक वॉशिंगटन ने सीधे ‘समावेशी चुनाव’ की सार्वजनिक माँग टांगकर नहीं कही।
टाइमलाइन — ताज़ा घटनाएँ (संक्षेप)
5-11 जनवरी 2026: NSA खलीलुर रहमान की US/UAE यात्रा — स्टेट डिपार्टमेंट अधिकारियों से मुलाकात।
14–15 जनवरी 2026: युनुस के ‘माफी पर सुलह’ संबंधी बयान; उन्होंने कहा कि अभी ‘पश्चाताप’ के बिना रीकॉन्सिलिएशन संभव नहीं।
दिसंबर 2025: तारिक रहमान की वापसी और BNP का राजनीतिक सक्रिय हित्मुक़्क़दमा।
12 फ़रवरी 2026: वर्तमान में राष्ट्रीय चुनाव तय — सविस्तार अनिश्चितता के साथ।
क्या देखना ज़रूरी है
1.आवामी लीग का आधिकारिक रुख — क्या पार्टी/शेख हसीना सार्वजनिक माफी या किसी तरह का बयान देती हैं? (यह निर्णायक होगा)।
2.अंतरिम सरकार की शर्तों में नरमी या कड़ाई — क्या युनुस की शर्तें बदलीं या विस्तृत हुईं?
3.अंतरराष्ट्रीय (भारत/अमेरिका) दबाव और मध्यस्थता — वाशिंगटन और नई दिल्ली की धारणा/दखल अहम रहेगी।














