अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) परिसर में मंगलवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने पूरे विश्वविद्यालय समुदाय को झकझोर कर रख दिया। विश्वविद्यालय के सरोजिनी नायडू (SN) हॉल में रहने वाली 20 वर्षीय छात्रा इंशाह फातिमा ने अपने हॉस्टल कमरे में आत्महत्या कर ली। वह उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद की रहने वाली थीं और AMU में डिप्लोमा इंजीनियरिंग की फाइनल ईयर की छात्रा थीं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इंशाह फातिमा ने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या की। बताया जा रहा है कि घटना के समय वह अपने परिवार के किसी सदस्य से वीडियो कॉल पर बात कर रही थीं। जैसे ही हॉल स्टाफ और अन्य छात्राओं को इस बात की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत प्रशासन को सूचित किया और दरवाजा खुलवाकर छात्रा को बाहर निकाला गया।
छात्रा की हालत गंभीर होने पर उसे तत्काल जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन इलाज के दौरान इंशाह फातिमा की मौत हो गई। छात्रा की मौत की खबर मिलते ही पूरे विश्वविद्यालय परिसर में शोक की लहर दौड़ गई।
सिविल लाइन थाना क्षेत्र में हुई घटना, पुलिस जांच में जुटी
यह मामला अलीगढ़ के सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया गया। पुलिस ने कहा है कि आत्महत्या के पीछे के कारणों का अभी स्पष्ट रूप से पता नहीं चल पाया है।
पुलिस परिवार के सदस्यों, सहपाठियों, हॉस्टल की अन्य छात्राओं और परिचितों से पूछताछ कर रही है। इसके साथ ही छात्रा के कमरे की बारीकी से जांच की जा रही है। मोबाइल फोन, डायरी, नोट्स और अन्य निजी सामानों को भी जांच के दायरे में लिया गया है, ताकि यह समझा जा सके कि छात्रा किन परिस्थितियों से गुजर रही थी।
AMU प्रशासन की त्वरित कार्रवाई, कुलपति भी पहुंचीं मेडिकल कॉलेज
AMU प्रशासन और प्रॉक्टोरियल टीम ने घटना पर तुरंत संज्ञान लिया। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रोफेसर डॉ. वसीम अली ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सूचना मिलते ही प्रॉक्टोरियल टीम मौके पर पहुंची और छात्रा को बिना किसी देरी के मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
उन्होंने कहा कि हॉल स्टाफ और प्रशासन ने पूरी तत्परता से कार्रवाई की। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून भी छात्रा की स्थिति जानने के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचीं और डॉक्टरों से बातचीत की। प्रशासन ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है।
आत्महत्या के कारण अब भी रहस्य, मानसिक स्वास्थ्य पर उठे सवाल
फिलहाल आत्महत्या के पीछे के कारण स्पष्ट नहीं हो सके हैं। प्रारंभिक जांच में पढ़ाई का दबाव, व्यक्तिगत समस्याएं, मानसिक तनाव या अन्य सामाजिक कारण—इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की गहन जांच की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर विश्वविद्यालय परिसरों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग सुविधाओं और हॉस्टल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षा के दौरान छात्रों पर अकादमिक, सामाजिक और पारिवारिक दबाव कई बार मानसिक तनाव को बढ़ा देता है, जिसे समय रहते पहचानना और संभालना बेहद ज़रूरी है।
संवेदनशील समय में संयम और सहयोग की आवश्यकता
इंशाह फातिमा की असमय मृत्यु न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे शैक्षणिक समुदाय के लिए एक अपूरणीय क्षति है। यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि छात्रों की भावनात्मक और मानसिक स्थिति को समझने, उनसे संवाद बनाए रखने और समय पर सहायता उपलब्ध कराने की कितनी आवश्यकता है।














