नोएडा अथॉरिटी और नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) में जारी कैलेंडर विवाद अब सिर्फ आंतरिक चर्चा का विषय नहीं रहा, बल्कि यह बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई में तब्दील हो गया है। इस विवाद का सबसे बड़ा असर यह हुआ कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी महेंद्र प्रसाद को OSD, नोएडा अथॉरिटी और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ED), NMRC जैसे अहम पदों से हटा दिया गया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब कुछ ही समय पहले नोएडा अथॉरिटी के CEO आईएएस एम. लोकेश द्वारा इसी विवादित कैलेंडर का भव्य विमोचन किया गया था। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब कैलेंडर में कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन था, तो उसका आधिकारिक विमोचन किस आधार पर किया गया?
क्या है कैलेंडर विवाद?
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, नोएडा अथॉरिटी और NMRC से जुड़े इस कैलेंडर को लेकर
प्रक्रियागत नियमों की अनदेखी,
अनधिकृत सामग्री या प्रस्तुति,
और स्वीकृति से जुड़ी औपचारिकताओं को लेकर सवाल उठाए गए थे।
मामला सामने आने के बाद शासन स्तर पर इसकी गंभीरता से समीक्षा की गई, जिसके बाद यह सख्त फैसला लिया गया।
एक कैलेंडर और इतनी बड़ी कार्रवाई?
प्रशासनिक गलियारों में यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है कि
क्या एक कैलेंडर इतना बड़ा मुद्दा था कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को दो-दो महत्वपूर्ण पदों से हटाना पड़ा?
क्या केवल महेंद्र प्रसाद पर कार्रवाई कर मामला समाप्त कर दिया जाएगा, या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी?
क्या यह कार्रवाई जवाबदेही तय करने की शुरुआत है या फिर केवल “प्रतीकात्मक” कदम?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अब व्यक्तिगत चूक से आगे बढ़कर सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
प्रशासन में हलचल, अफसरशाही में संदेश
इस कार्रवाई के बाद नोएडा अथॉरिटी और NMRC के प्रशासनिक ढांचे में खलबली मची हुई है। अफसरशाही के भीतर इसे एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि
“छोटी दिखने वाली लापरवाही भी बड़े परिणाम ला सकती है।”
साथ ही यह भी साफ हो गया है कि सरकारी संस्थानों में
प्रकाशन, प्रचार और आधिकारिक कार्यक्रम अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि पूरी जवाबदेही के साथ किए जाने होंगे।
अब आगे क्या?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि
इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच होगी या नहीं,
अन्य अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाएगा या नहीं,
या मामला यहीं समाप्त मान लिया जाएगा।
लेकिन इतना तय है कि “कैलेंडर का बवाल” नोएडा प्रशासन के इतिहास में एक ऐसा उदाहरण बन गया है, जिसने यह दिखा दिया कि
कागज़ पर छपा एक कैलेंडर भी सत्ता और जिम्मेदारी की कुर्सियां हिला सकता है।
यह मामला अब सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है।














