मुंबई: मुंबई बीएमसी चुनाव की सरगर्मियों के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने टीवी9 भारतवर्ष को दिए विशेष इंटरव्यू में खुलकर अपनी बात रखी। बातचीत के दौरान मराठी मानुष, राज ठाकरे के साथ गठबंधन, शिवसेना की विचारधारा, महाविकास अघाड़ी की स्थिति और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व बीजेपी की नीतियों पर उन्होंने तीखे और राजनीतिक रूप से अहम बयान दिए।
यह इंटरव्यू सिर्फ चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि मुंबई, महाराष्ट्र और मराठी अस्मिता को लेकर उद्धव ठाकरे की सोच को भी साफ करता है।
मराठी मानुष को ताकत मिली या अभी संघर्ष बाकी?
बालासाहेब ठाकरे के 2004 के बयान को याद करते हुए उद्धव ठाकरे कहते हैं— “ताकत आनी चाहिए थी, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हम दूसरी भाषाओं के खिलाफ हैं। बालासाहेब ‘हिंदू हृदय सम्राट’ थे। पूरे देश में हम हिंदू हैं, महाराष्ट्र में मराठी हैं। भाषा के आधार पर राज्यों का गठन हुआ, लेकिन महाराष्ट्र को अपनी राजधानी मुंबई के लिए खून बहाना पड़ा।”
उद्धव ठाकरे ने कहा कि आज स्थिति यह है कि मुंबई में मराठी लोगों को ही बेदखल किया जा रहा है, जबकि बीजेपी समर्थित कुछ बिल्डर मराठी समाज के अधिकारों पर कब्जा कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि—
मुंबई का आर्थिक केंद्र गुजरात शिफ्ट किया गया
डायमंड मार्केट, बड़े आयोजन, निवेश सब गुजरात ले जाए गए
मराठी और गुजराती के बीच तनाव पैदा करने की कोशिश बीजेपी कर रही है “यह मराठी बनाम गुजराती नहीं, बल्कि महाराष्ट्र बनाम लूट की लड़ाई है।”
बीएमसी सत्ता नहीं मिली तो मराठी अस्तित्व को खतरा क्यों?
इस सवाल पर उद्धव ठाकरे ने सीधा पलटवार करते हुए कहा—“देवेंद्र फडणवीस हिंदू हैं या नहीं? अगर हैं तो मराठी हिंदू को हिंदू क्यों नहीं मानते?”
उन्होंने कहा कि अगर फडणवीस मुंबई के होते, तो मुंबई की तिजोरी को लूटने नहीं देते।
उनका आरोप है कि मुंबई के संसाधनों का इस्तेमाल महाराष्ट्र के बाहर किया जा रहा है, जिससे मराठी समाज को हाशिए पर धकेला जा रहा है।
20 साल बाद राज ठाकरे के साथ गठबंधन
राज ठाकरे के साथ गठबंधन पर उद्धव ठाकरे ने फिल्मी अंदाज़ में जवाब दिया—“एक फिल्म आई थी—‘20 साल बाद’… अब हम 20 साल बाद नई पिक्चर बनाएंगे।”
यह बयान संकेत देता है कि यह गठबंधन सिर्फ चुनावी मजबूरी नहीं, बल्कि मराठी अस्मिता को केंद्र में रखने की राजनीतिक कोशिश है।
जनसभाओं में उत्साह और प्रदूषण पर हमला
राज और आदित्य ठाकरे के साथ लगातार शाखाओं, रोड शो और जनसभाओं में शामिल होने पर उन्होंने कहा—“उत्साह बहुत है। मैं हमेशा कार्यकर्ताओं के बीच रहा हूं। अब आदित्य ज्यादा जा रहा है क्योंकि मेरी तबीयत और बोलने में दिक्कत हो रही है।”
प्रदूषण को लेकर उन्होंने फडणवीस सरकार पर तंज कसते हुए कहा—“यह विकास नहीं, करप्शन का प्रदूषण है।”
कोविड और ‘मुंबई मॉडल’
कोविड काल में मुख्यमंत्री रहते हुए किए गए कामों पर उद्धव ठाकरे ने कहा—“मुंबई मॉडल की तारीफ पूरी दुनिया में हुई। 18 दिन में फील्ड अस्पताल बनाए गए, जानें बचाईं।”
उन्होंने गिनाया कि—
कोस्टल रोड परियोजना
बीएसटी सेवा में सुधार
500 स्क्वायर फीट तक प्रॉपर्टी टैक्स माफी
मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने की योजना
यह सब उनकी सरकार की उपलब्धियां रहीं।
‘मुस्लिम समर्थक’ आरोपों पर करारा जवाब
बीजेपी के आरोपों पर उद्धव ठाकरे ने व्यंग्य के साथ जवाब दिया—“उनके पास कोई मुद्दा नहीं बचा। मेरी गलती यह है कि मैं सौगात-ए-मोदी बांटने नहीं गया, ताजिए के नीचे नहीं चला, नवाज शरीफ का केक खाने नहीं गया और मोहन भागवत के साथ मस्जिद नहीं गया।”
उन्होंने कहा कि मुद्दों पर बात हो—
बीजेपी ने विकास नहीं किया
3-4 साल में तीन लाख करोड़ का घोटाला हुआ
महाराष्ट्र में ड्रग्स का नेटवर्क फैल गया
डांस बार और ड्रग फैक्ट्रियों के पीछे कौन है, यह सवाल पूछा जाना चाहिए
महाविकास अघाड़ी में दरार?
महायुति और एमवीए दोनों में अंदरूनी खींचतान पर उद्धव ठाकरे ने कहा—“महाविकास अघाड़ी थोड़ी बिखरी जरूर है, लेकिन हम एक-दूसरे पर सार्वजनिक हमला नहीं कर रहे, जैसा महायुति में हो रहा है।”
उद्धव ठाकरे का यह इंटरव्यू साफ संकेत देता है कि बीएमसी चुनाव सिर्फ नगर निगम का चुनाव नहीं, बल्कि मुंबई की दिशा, मराठी अस्मिता और महाराष्ट्र की राजनीति की लड़ाई है।
राज ठाकरे के साथ गठबंधन, बीजेपी पर तीखे हमले और मराठी मुद्दे को केंद्र में रखकर शिवसेना (यूबीटी) इस चुनाव को अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है।
अब देखना यह है कि मुंबई की जनता इस “20 साल बाद” वाली नई पिक्चर को कितना पसंद करती है।














