नगर निगम चुनाव में अब सिर्फ चार दिन शेष हैं और ऐसे में राज्य में सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है। सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है—कहीं पुराने घोटालों को उछालकर राजनीतिक घाव कुरेदे जा रहे हैं तो कहीं हिंदुत्व जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे पर तीखे हमले हो रहे हैं। कई स्थानों पर मतदाताओं से भावनात्मक अपील भी की जा रही है।
इसी बीच राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने टीवी9 मराठी को एक इंटरव्यू दिया, जिसमें वे काफी भावुक नजर आए। बातचीत के दौरान उनकी आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
‘मेरे दरवाजे किसी के लिए बंद नहीं हैं’
इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए मातोश्री के दरवाजे बंद हैं, तो उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट कहा,
“ऐसा नहीं है। मेरे दरवाजे किसी के लिए बंद नहीं हैं। लेकिन मातोश्री को बदनाम करना बंद कीजिए, हमारे परिवार को बदनाम करना बंद कीजिए। आप मातोश्री को बदनाम क्यों कर रहे हैं?”
‘मोदी ने मुझे नकली बच्चा कहा’
उद्धव ठाकरे ने कहा,
“मैं किसी की व्यक्तिगत आलोचना नहीं कर रहा, मैं राजनीति की बात कर रहा हूं। मैं बीजेपी और अमित शाह की आलोचना करता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे ‘नकली बच्चा’ कहा। यह कैसी संस्कृति है?”
उन्होंने आगे दावा किया कि अगर उस समय बालासाहेब ठाकरे ने मोदी को समर्थन न दिया होता, तो वे राष्ट्रीय राजनीति में पहचान ही नहीं बना पाते।
भावुक होकर छलके आंसू
बातचीत के दौरान उद्धव ठाकरे ने प्रमोद महाजन और अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रमोद महाजन बेहद कर्मठ और जानकार नेता थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक समय वाजपेयी जी मोदी से नाराज़ थे और उन्हें राजनीतिक रूप से अलग करने की स्थिति बन गई थी, लेकिन बालासाहेब ठाकरे ने उनका साथ दिया।
यह कहते-कहते उद्धव ठाकरे भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। हालांकि जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि यह प्रदूषण की वजह से हुआ है और साफ कहा—
“मैं आंसू बहाने वाला व्यक्ति नहीं हूं।”
‘मेरे मन और मेरे शब्दों में कोई अंतर नहीं’
उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि उनके मन और शब्दों में कोई फर्क नहीं है।
“जो बात मुझे समझ में नहीं आती, वह नहीं आती। अगर दुश्मन की बात हो तो मैं साफ कहता हूं कि ठीक है, लेकिन दोस्त की बात हो तो गलत को गलत कहता हूं। यही अपेक्षा मैं दूसरों से भी करता हूं। अगर मुझे कुछ समझ में नहीं आता, तो मुझे समझाइए।”
बालासाहेब और परिवार का जिक्र
उन्होंने अपने पिता और दादा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके दादाजी विद्वान थे और उन्हें इतिहास की गहरी समझ थी। बालासाहेब ठाकरे का परिचय देने की कोई आवश्यकता नहीं है। उद्धव ठाकरे ने बालासाहेब का एक प्रसिद्ध कथन भी याद किया—
“आलोचना इस तरह करो कि सामने वाले को लगे ही नहीं कि उसकी आलोचना हो रही है।”
अंत में उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीति में जो कुछ हो रहा है, वह सही नहीं है।














