Friday, January 16, 2026
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प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद महाराजगंज पहुंचे पंकज चौधरी, अमनमणि त्रिपाठी से मुलाकात के सियासी मायने

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी पहली बार अपने गृह जनपद महाराजगंज पहुंचे हैं। उनके आगमन को लेकर क्षेत्र में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। उनके आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है—आम लोग हों या राजनीतिक हस्तियां, हर कोई उनसे मुलाकात कर शुभकामनाएं दे रहा है।

इसी क्रम में मंगलवार को नौतनवां के पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी भी पंकज चौधरी से मिलने पहुंचे। अमनमणि ने इस मुलाकात की जानकारी खुद सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने पंकज चौधरी के साथ तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा कि महाराजगंज में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के जनपद आगमन पर उनके आवास जाकर शुभकामनाएं दीं और मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

महाराजगंज में चौधरी का मजबूत सियासी कद
पंकज चौधरी सात बार के सांसद हैं और लंबे समय से महाराजगंज की राजनीति में उनका दबदबा रहा है। वहीं अमनमणि त्रिपाठी भी इसी जनपद की नौतनवां विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। उनके पिता अमरमणि त्रिपाठी एक दौर में उत्तर प्रदेश की राजनीति का बड़ा नाम रहे हैं और कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह व रामप्रकाश गुप्ता की सरकारों में मंत्री पद संभाल चुके हैं।

मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के बाद अमरमणि त्रिपाठी की सियासी जमीन कमजोर पड़ी, लेकिन हाल के वर्षों में परिवार एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अमरमणि त्रिपाठी क्षेत्र में लगातार लोगों से मिल रहे हैं और सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी बढ़ा रहे हैं।

प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद महाराजगंज पहुंचे पंकज चौधरी, अमनमणि त्रिपाठी से मुलाकात के सियासी मायने

राजनीतिक उतार-चढ़ाव की लंबी कहानी
2002 में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से टिकट न मिलने के बाद अमरमणि त्रिपाठी ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर कैबिनेट मंत्री बने। हालांकि मायावती सरकार के दौरान उन्हें मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में जेल जाना पड़ा। इसके बाद 2012 में उनके बेटे अमनमणि त्रिपाठी ने राजनीति में कदम रखा और नौतनवां से जीत दर्ज की।

2022 के विधानसभा चुनाव में अमनमणि बसपा के टिकट पर मैदान में उतरे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। निषाद पार्टी के प्रत्याशी ऋषि त्रिपाठी ने उन्हें शिकस्त दी। 1980 के बाद से उत्तर प्रदेश में हुए 11 विधानसभा चुनावों में अमरमणि त्रिपाठी चार बार और अमनमणि एक बार विधायक चुने गए हैं।

पंकज चौधरी–अमनमणि मुलाकात के क्या हैं मायने?
पंकज चौधरी और अमनमणि त्रिपाठी की इस मुलाकात को 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। अमनमणि फिलहाल किसी पद पर नहीं हैं और भविष्य की राजनीतिक राह तलाशते नजर आ रहे हैं। पहले भी उनकी पंकज चौधरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकातें हो चुकी हैं। 2023 में अमरमणि त्रिपाठी की रिहाई के बाद अमनमणि ने सीएम योगी को अपना मार्गदर्शक बताया था।

2022 में महाराजगंज की सियासी तस्वीर
महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत नौतनवां, सिसवा, फरेंदा, पनियरा और महाराजगंज विधानसभा सीटें आती हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन पांच में से चार सीटों पर जीत दर्ज की थी। महाराजगंज सीट से जय मंगल, सिसवा से प्रेम सिंह पटेल और पनियरा से ज्ञानेंद्र सिंह विजयी रहे थे। फरेंदा एकमात्र ऐसी सीट थी जहां भाजपा को हार का सामना करना पड़ा और कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी ने बाजी मारी थी।

पंकज चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उनकी यह पहली क्षेत्रीय यात्रा और अमनमणि त्रिपाठी से मुलाकात आने वाले समय में महाराजगंज की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत के तौर पर देखी जा रही है।

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