Friday, January 16, 2026
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दिल्ली दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत से इनकार, 5 अन्य आरोपियों को सशर्त राहत

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया दोनों के खिलाफ साजिश के स्पष्ट तथ्यात्मक साक्ष्य मौजूद हैं और यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

हालांकि, इसी मामले में लंबे समय से जेल में बंद पांच अन्य आरोपियों — गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद — को सुप्रीम कोर्ट ने 12 कड़ी शर्तों के साथ जमानत दे दी है।

देश की सुरक्षा सर्वोपरि: सुप्रीम कोर्ट

फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूएपीए जैसे विशेष कानूनों के प्रावधानों की अनदेखी नहीं की जा सकती। केवल ट्रायल में देरी के आधार पर ऐसे गंभीर मामलों में जमानत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष को निरंतर हिरासत की आवश्यकता है क्योंकि आरोप आतंकी गतिविधियों से जुड़े हैं।

न्यायालय ने यह भी कहा कि यूएपीए की धारा 15 के तहत आतंकवादी कृत्य की परिभाषा केवल हिंसा या हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि वे कृत्य भी इसमें शामिल हैं जो सार्वजनिक सेवाओं को बाधित करते हैं या देश की अर्थव्यवस्था को खतरे में डालते हैं।

जमानत का मंच नहीं है बचाव पक्ष का मूल्यांकन

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत सुनवाई का उद्देश्य बचाव पक्ष के पूरे मामले का मूल्यांकन करना नहीं होता। न्यायिक संयम का अर्थ कर्तव्य से पीछे हटना नहीं है। अदालत को यह देखना होता है कि:

क्या जांच से प्रथम दृष्टया अपराध बनता है?

क्या आरोपी की भूमिका और अपराध के बीच उचित संबंध है?

उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका अलग

कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका अन्य आरोपियों से गुणात्मक रूप से अलग है। रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि सभी आरोपियों की सहभागिता समान नहीं है। इसलिए प्रत्येक आरोपी की जमानत याचिका का स्वतंत्र और अलग-अलग मूल्यांकन आवश्यक है।

अनुच्छेद 21 और लंबी हिरासत

कोर्ट ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत लंबी पूर्व-ट्रायल हिरासत को राज्य को उचित ठहराना होगा। जेल में होना अपने आप में सजा नहीं है, लेकिन यूएपीए की धारा 43D(5) सामान्य जमानत प्रावधानों से अलग है और इसमें कड़ी शर्तें लागू होती हैं।

भविष्य में राहत की संभावना

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि एक वर्ष के भीतर ट्रायल पूरा नहीं होता है, तो उमर खालिद और शरजील इमाम पुनः जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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