महाराष्ट्र में आगामी नगर निगम चुनावों को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गर्मा चुका है। चुनावी रण में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद मोर्चा संभालते नजर आएंगे। मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री अगले 12–13 दिनों में करीब 40 से 45 चुनावी रैलियां करेंगे। ये रैलियां राज्य की सभी प्रमुख और छोटी नगर निगमों को ध्यान में रखकर रणनीतिक रूप से तय की गई हैं।
बड़े शहरों में ज्यादा सभाएं, छोटे निगमों में एक-एक रैली
सूत्रों के मुताबिक, बड़ी नगर निगमों में 3 से 4 सभाएं, जबकि छोटी नगर निगमों में एक-एक सभा आयोजित की जाएगी।
मुंबई, पुणे, पिंपरी-चिंचवड, ठाणे, नवी मुंबई, नासिक, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर जैसे अहम शहरी क्षेत्रों में दो से अधिक जनसभाएं करने की योजना है। इन शहरों को चुनावी लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रोज़ 10 सभाओं का लक्ष्य, प्रचार को मिलेगी रफ्तार
भाजपा सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री प्रतिदिन लगभग 10 जनसभाएं करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। इससे पहले स्थानीय निकाय चुनावों में भी फडणवीस ने व्यापक स्तर पर सभाएं की थीं और अब नगर निगम चुनावों में भी उसी रणनीति को दोहराया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह आक्रामक प्रचार अभियान भाजपा और उसके सहयोगी दलों को चुनावी बढ़त दिला सकता है।
चुनावी कार्यक्रम पर एक नजर
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, नगर निगम चुनावों के लिए प्रचार अभियान तेज हो चुका है।
•15 जनवरी को मतदान
•16 जनवरी को मतगणना
•मंगलवार नामांकन की अंतिम तिथि थी
•आज नामांकन पत्रों की वापसी
•इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी
चुनावी हलचल के बीच मंत्रिमंडल का बड़ा फैसला
एक ओर जहां चुनाव प्रचार जोरों पर है, वहीं दूसरी ओर फडणवीस मंत्रिमंडल की बैठक में एक अहम निर्णय भी लिया गया है। मंत्रिमंडल ने अमरावती जिले के चिखलदरा में स्थित महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम (MTDC) की करीब तीन एकड़ भूमि को श्री अंबादेवी संस्थान को आवंटित करने की मंजूरी दे दी है।
अनुपयोगी भूमि का धार्मिक उपयोग
बताया गया कि चिखलदरा में कुल लगभग साढ़े सात एकड़ भूमि वर्ष 1975 में पर्यटन विकास के उद्देश्य से एमटीडीसी को दी गई थी, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा लंबे समय से अनुपयोगी पड़ा था। अब सरकार पर्यटन विकास निगम से लगभग तीन एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर इसे नि:शुल्क श्री अंबादेवी मंदिर संस्थान को सौंपेगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह भूमि मंदिर संस्थान को द्वितीय श्रेणी के कब्जेदार के रूप में दी जाएगी और इसका उपयोग केवल धार्मिक कार्यों के लिए ही किया जा सकेगा।
चुनावी सरगर्मी और मंत्रिमंडल के फैसलों के बीच महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है।
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