गाजा में युद्धविराम को लागू करने के लिए अमेरिका द्वारा साइन की गई 20-प्वाइंट शांति योजना अब एक नए और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। इस योजना के तहत प्रस्तावित गाजा स्टेबिलाइजेशन प्रोजेक्ट के लिए अमेरिका अब पाकिस्तान से भी सैनिक भेजने की मांग कर रहा है। इस मांग ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को मुश्किल में डाल दिया है।
हालांकि अब संकेत मिल रहे हैं कि मुनीर गाजा में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार हो सकते हैं, लेकिन यदि वे अंतिम समय में पीछे हटते हैं तो इसके गंभीर राजनीतिक और कूटनीतिक परिणाम पाकिस्तान को भुगतने पड़ सकते हैं।
अमेरिका में अब ‘डबल गेम’ नहीं चलेगा?
पाकिस्तान की वर्षों पुरानी रणनीति—अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़े वादे और ज़मीनी स्तर पर सीमित अमल—अब अमेरिका में कम प्रभावी साबित हो सकती है। यूएई स्थित मीडिया आउटलेट अल अरबिया पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, आसिम मुनीर ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हाई-रिस्क गाजा स्टेबिलाइजेशन योजना के तहत सैनिक सहयोग का संकेत दिया है।
लेकिन रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि अगर ट्रंप को यह महसूस हुआ कि मुनीर केवल आश्वासन दे रहे हैं और वास्तविक योगदान से बच रहे हैं, तो पाकिस्तान को मिलने वाली अमेरिकी राजनीतिक और आर्थिक गारंटियां तेजी से कमजोर पड़ सकती हैं।
पाकिस्तान को महंगी पड़ सकती है ‘धोखाधड़ी’
रिपोर्ट में कहा गया है कि आसिम मुनीर का उभार ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका गाजा के लिए एक इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इस संभावित समझौते के तहत पाकिस्तान सैनिक देगा और बदले में अमेरिका आर्थिक सहायता, कूटनीतिक संरक्षण और पाकिस्तान के आंतरिक राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का रवैया अपनाएगा।
हालांकि अगर यह सौदा सिर्फ वादों तक सीमित रहा, तो पाकिस्तान के लिए यह रणनीति उलटी पड़ सकती है।
इमरान खान फैक्टर और अमेरिका की चुप्पी
रिपोर्ट का दावा है कि यह लेन-देन आधारित समझौता खास तौर पर इमरान खान और उनकी पार्टी PTI के खिलाफ कार्रवाई पर अमेरिका की चुप्पी से जुड़ा हुआ है। लेकिन जैसे-जैसे दबाव बढ़ रहा है, पाकिस्तान का पुराना रवैया—ज़्यादा वादे, कम अमल—फिर सामने आने लगा है।
कहा जा रहा है कि मुनीर ISF को लेकर कदम पीछे खींच रहे हैं, जबकि भू-राजनीतिक लाभ पूरी तरह हासिल करने की कोशिश जारी है।
तीन स्तंभों पर टिकी है मुनीर की ताकत
विशेषज्ञों के अनुसार, आज आसिम मुनीर की सत्ता तीन मुख्य स्तंभों पर टिकी हुई है—
1.सेना और खुफिया एजेंसियों पर पूर्ण नियंत्रण
2.इस्लामाबाद में कमजोर नागरिक सरकार
3.इमरान खान की राजनीतिक चुनौती को व्यवस्थित तरीके से कमजोर करना
गाजा भेजे सैनिक तो भड़केगा पाकिस्तान?
रक्षा विश्लेषक और लेखिका आयशा सिद्दीका के अनुसार, पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र मुस्लिम-बहुल देश है जिसके पास परमाणु हथियार हैं, इसी कारण उससे सैन्य योगदान की अपेक्षा अधिक की जा रही है।
लेकिन गाजा में सैनिक भेजने का फैसला मुनीर के लिए राजनीतिक आत्मघाती साबित हो सकता है। पाकिस्तान की जनता पहले ही अमेरिका और इजराइल के खिलाफ कड़ा रुख रखती है। ऐसे में अमेरिकी शांति योजना के तहत पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती से देश में इस्लामवादी संगठनों के बड़े विरोध प्रदर्शन भड़क सकते हैं।
फंसे हैं मुनीर
एक तरफ अमेरिका का बढ़ता दबाव, दूसरी ओर देश के भीतर उबलता जनाक्रोश—आसिम मुनीर इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां एक गलत फैसला पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों मोर्चों पर भारी नुकसान पहुंचा सकता है।














