मुंबई — आगामी बीएमसी चुनाव से पहले महायुति में हुई अहम बैठक में सीट बंटवारे पर प्रारम्भिक सहमति बन चुकी है। बैठक के बाद दोनों पक्षों ने संकेत दिया कि बीजेपी और शिंदे-गुट वाली शिवसेना ने 207 सीटों पर आपसी समझौता कर लिया है — भाजपा 128 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और शिवसेना 79 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी; बाकी 20 सीटों पर वरिष्ठ नेताओं और जमीनी हालात को देखते हुए अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में क्या तय हुआ और किसने क्या कहा
बैठक में मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम के नेतृत्व में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की संयुक्त रैली कहां होगी, चुनाव प्रचार की रणनीति किस दिशा में होगी — इन सब विषयों पर भी चर्चा हुई। महायुति की चुनाव रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए उच्चस्तरीय परामर्श जारी है।
शिवसेना प्रतिनिधि का वक्तव्य
शिंदे-गुट के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद राहुल शेवाले ने भी सीट बंटवारे की पुष्टि की और कहा कि 128-79 के फार्मूले पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि शेष 20 सीटों के बारे में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श के बाद फाइनल फैसला करेंगे। इस सहमति के बाद महायुति की बीएमसी में चुनावी दिशा काफी हद तक स्पष्ट मानी जा रही है।
मतदान तिथि, नामांकन और चुनावी शिद्दत
राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निगम (बीएमसी) चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है — मतदान 15 जनवरी को होंगे और मतगणना 16 जनवरी को। नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 दिसंबर रखी गई है, जिससे न केवल प्रत्याशियों की फाइनल सूची तय होगी बल्कि चुनावी हलचल भी तेज हो गई है।
उद्धव-ठाकरे और एमएनएस के गठबंधन के लिए चुनौती
बीजेपी व शिंदे-गुट के इस गठबंधन और उनके दूसरे नगर निगमों में बन्दोबस्त ने उद्धव ठाकरे के उद्धव-गुट और राज ठाकरे के MNS के गठजोड़ के लिए चुनौती बढ़ा दी है। खासकर कल्याण-दोंबिवली जैसे नगर निगमों में महायुति के द्वारा गठबंधन किए जाने को राजनीतिक मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण रणनीतिक चाल माना जा रहा है।
क्यों मायने रखता है
128-79 के प्रारम्भिक समझौते से महायुति मुंबई में आक्रामक चुनाव रणनीति दिखा रही है — परंतु बचे 20 सीटों की दिशा और नामांकन के बाद बने समीकरण अंतिम तस्वीर तय करेंगे। निकट आने वाले दिनों में प्रत्याशियों के ऐलानों और उम्मीदवार सूची से यह स्पष्ट होगा कि महायुति कितनी मजबूती से मुंबई की नगर राजनीति पर प्रभाव दिखा पाती है














