राज्य में नगर निगम चुनावों से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। बैठकों, इंटरव्यू, चर्चाओं और सीटों के बंटवारे के बीच बुधवार सुबह नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष और राज्य के डिप्टी मुख्यमंत्री अजित पवार ने ऐसा कदम उठाया, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी।
अजित पवार बुधवार सुबह अचानक पुणे के बारामती हॉस्टल से बिना किसी को बताए निकल गए। खास बात यह रही कि इस दौरान उनके साथ न तो कोई सरकारी काफिला था और न ही पुलिस सुरक्षा। वह पूरी तरह अकेले निकले, जिससे राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े हो गए—आख़िर अजित पवार गए कहां और क्यों?
चुनाव चिन्ह बना विवाद की वजह?
पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा ज़ोरों पर थी कि पुणे नगर निगम चुनावों में NCP के दोनों गुट—शरद पवार गुट और अजित पवार गुट—एक साथ चुनाव लड़ सकते हैं। सीटों के बंटवारे को लेकर भी लगभग सहमति बन चुकी थी।
हालांकि, सूत्रों के मुताबिक मामला चुनाव चिन्ह पर आकर अटक गया। चुनाव किस चिन्ह पर लड़ा जाए—‘घड़ी’ या ‘तुरही’—इसी मुद्दे पर दोनों गुटों के बीच सहमति नहीं बन पाई। इसी के बाद अजित पवार का अचानक हॉस्टल छोड़ना कई अटकलों को जन्म दे रहा है।
राजनीतिक नाराज़गी या निजी वजह?
शरद पवार गुट के साथ बातचीत बिगड़ने के बाद अजित पवार का इस तरह बिना सुरक्षा अकेले निकल जाना राजनीतिक संकेतों से भरा माना जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह कदम किसी पारिवारिक कारण से जुड़ा है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक फैसला छिपा है?
बताया जा रहा है कि हॉस्टल से निकलते वक्त अजित पवार ने कथित तौर पर कहा, “कोई वापस न आए।” इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि वह अपने साले के घर पहुंचे हैं, हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आखिर हुआ क्या?
पुणे नगर निगम चुनावों को लेकर NCP के दोनों गुटों के बीच चल रही बातचीत टूटने की चर्चा के बीच मंगलवार देर रात शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP की महा विकास अघाड़ी के साथ करीब चार से पांच घंटे लंबी बैठक हुई थी। इसके कुछ ही घंटों बाद बुधवार सुबह अजित पवार का बिना सुरक्षा के अचानक निकल जाना सियासी घटनाक्रम को और रहस्यमय बना रहा है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि अजित पवार आगे क्या कदम उठाते हैं और क्या NCP के दोनों गुटों के बीच सुलह की कोई गुंजाइश बाकी है या नहीं।














