जनवरी में महाराष्ट्र में बीएमसी समेत कई प्रमुख नगरपालिकाओं के चुनाव होने हैं और इससे पहले राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में प्रमोद महाजन के बड़े भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के वरिष्ठ नेता प्रकाश महाजन की शिवसेना प्रमुख और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रकाश महाजन जल्द ही शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह आज या जल्द ही राज ठाकरे की मनसे को अलविदा कह सकते हैं। बताया जा रहा है कि ठाणे में उनके औपचारिक रूप से शिवसेना में शामिल होने की पूरी संभावना है।
अगर प्रकाश महाजन शिवसेना में शामिल होते हैं, तो इसे मनसे के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। खासतौर पर मराठवाड़ा क्षेत्र में शिवसेना की स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही, पार्टी में उन्हें कौन-सा अहम पद सौंपा जाएगा, इस पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
राज ठाकरे के लिए बढ़ती मुश्किलें
राज ठाकरे बीते तीन दशकों से महाराष्ट्र की राजनीति का जाना-माना चेहरा रहे हैं। अपनी आक्रामक भाषण शैली और मुद्दों को बेबाकी से उठाने के लिए वह हमेशा चर्चा में रहे हैं। हालांकि, हालिया विधानसभा चुनाव में मनसे को करारी हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद पार्टी की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठने लगे थे।
इसी बीच यह अटकलें तेज हो गई हैं कि राज ठाकरे अपनी पार्टी के एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता प्रकाश महाजन को खो सकते हैं, जो मनसे के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।
उद्धव ठाकरे के साथ गठबंधन का ऐलान
बुधवार को राज ठाकरे ने अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे के साथ गठबंधन का औपचारिक ऐलान किया। पार्टी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए राज ठाकरे ने यह बड़ा राजनीतिक फैसला लिया। गौरतलब है कि एक साल पहले तक दोनों नेता महाराष्ट्र की राजनीति में एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंद्वी माने जाते थे।
राज ठाकरे ने 2005 में शिवसेना (अब उद्धव ठाकरे गुट) से अलग होकर 2006 में मनसे की स्थापना की थी। 2009 के विधानसभा चुनाव में मनसे ने 13 सीटें जीतकर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सामने बड़ी चुनौती पेश की थी।
बीएमसी चुनाव पर टिकी मनसे की उम्मीदें
मौजूदा हालात में मनसे की राजनीतिक स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के लिए बीएमसी चुनाव एक बड़ा मौका माना जा रहा है। इसी वजह से काफी समय बाद उद्धव ठाकरे के साथ गठबंधन का फैसला लिया गया।
लेकिन ऐसे समय में अगर प्रकाश महाजन जैसे वरिष्ठ नेता मनसे का साथ छोड़ते हैं, तो यह पार्टी के लिए गंभीर झटका साबित हो सकता है और बीएमसी चुनाव की रणनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है।














