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दिल्ली सरकार ने आबकारी नियमों में बड़े संशोधन किए; स्पिरिट स्टोरेज और सैक्रामेंटल वाइन के नियम आसान हुए

दिल्ली, 22 दिसंबर 2025 — दिल्ली सरकार ने आज आबकारी नियमों (Excise Rules) में महत्त्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। आधिकारिक नोटिफिकेशन 22 दिसंबर, 2025 को जारी किया गया है; ये परिवर्तन गज़ट में प्रकाशित होने के बाद लागू होंगे। सरकार के अनुसार संशोधन का उद्देश्य उद्योगों और धार्मिक संस्थानों की व्यावहारिक ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए नियमों को सरल बनाना है।

प्रमुख बदलाव — एक नज़र में

स्पेशल डेनेचर्ड स्पिरिट का स्टोरेज लिमिट बढ़ा: एक ही जगह पर स्टोर किए जा सकने वाले स्पेशल डेनेचर्ड स्पिरिट की अधिकतम सीमा 6,744 किलोलीटर से बढ़ाकर 15,000 किलोलीटर कर दी गई है।

फॉर्म P-6 के तहत वार्षिक स्टोरेज सीमा में वृद्धि: उन संस्थानों के लिए जिनके पास फॉर्म P-6 के तहत स्पिरिट स्टोर करने की अनुमति है, सालाना स्टोरेज सीमा भी बढ़ाई गई है—ताकि बार-बार अनुमति लेने की ज़रूरत न पड़े।

चर्चों के लिए सैक्रामेंटल वाइन की सीमा में ढील: दिल्ली के बिशप को पूर्व में दी गई 91 लीटर प्रति वर्ष की सीमा को बढ़ाकर 4,000 लीटर प्रति वर्ष कर दिया गया है।

ड्यूटी व खरीद: सरकार ने स्पष्ट किया है कि सैक्रामेंटल वाइन ड्यूटी-फ़्री होगी और इसे भारत में किसी भी अधिकृत डिस्टिलरी से खरीदा जा सकेगा। परन्तु वाइन खरीदने के लिए एक्साइज कमिश्नर की पूर्व मंज़ूरी आवश्यक होगी और खरीद एक या अधिक परमिट के माध्यम से की जा सकती है।

सरकार ने क्या कहा

आबकारी विभाग के अधिकारियों ने बताकर कहा है कि ये सुधार नियमों को ज़्यादा प्रैक्टिकल और वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं। अधिकारियों का तर्क है कि संशोधनों से धार्मिक संस्थानों को प्रशासनिक बोझ से राहत मिलेगी और इंडस्ट्रीयल लाइसेंसधारकों को बड़े पैमाने पर स्टोरेज की सुविधा मिलने से कारोबार सुगम होगा।

प्रभाव और अपेक्षित लाभ

धार्मिक संस्थान: चर्च व अन्य धार्मिक संस्थाएँ अब अपनी धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आवश्यक मात्रा में वाइन व स्पिरिट आसानी से खरीद व स्टोर कर सकेंगी, जिससे अनावश्यक प्रशासनिक अड़चनों में कमी आएगी।

उद्योग: डेनेचर्ड स्पिरिट के स्टोरेज सीमा बढ़ने से प्रॉसेसिंग, उत्पादन और कच्चा माल भंडारण करने वाली यूनिटों को संचालन में लचीलापन मिलेगा और बार-बार परमिट लेने की अनिवार्यता घटेगी।

नियमन: अतिरिक्त शर्तें—जैसे एक्साइज कमिश्नर की मंज़ूरी—नियमों का संतुलन बनाए रखने में भूमिका निभाएँगी ताकि दुरुपयोग रोका जा सके।

क्या अगले कदम हैं?

सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक ये संशोधन तब प्रभावी होंगे जब वे आधिकारिक गज़ट में प्रकाशित हो जाएँ। प्रकाशित होते ही संबंधित लाइसेंसधारक और धार्मिक संस्थान नई शर्तों के अनुरूप आवेदन व व्यवस्था कर सकेंगे।

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VIKAS TRIPATHI
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