Friday, January 16, 2026
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यूपी विधानसभा: दूसरा दिन भी बहस और तीखी नोक-झोंक से भरपूर — कफ सिरप पर सियासी जंग तेज

उत्तर प्रदेश विधान सभा का आज का सत्र भी विवादों और हरकतों से भरा रहा। राज्य सरकार ने 2025-26 के लिए अनुपूरक बजट सदन में पेश किया, लेकिन विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी के विधायकों ने कफ-सिरप मामले पर लगातार घेरना जारी रखा। प्रश्नोत्तर के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ के तीखे जवाबों ने माहौल और गरमाया — उनके एक बयान पर सपा विधायकों का वॉकआउट भी हुआ और पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया (X) पर पलटवार कर दिया।

मुख्य घटनाक्रम

योगी सरकार ने सदन में अनुपूरक बजट पेश किया, पर बहस का मुख्य मुद्दा बना कफ-सिरप विवाद।

प्रश्नों का जवाब देते हुए सीएम ने कहा कि समय आने पर ‘बुलडोज़र एक्शन’ भी लिया जाएगा और राज्य में कफ-सिरप से कोई मौत रिपोर्ट नहीं हुई। साथ ही उन्होंने आरोपियों के तार समाजवादी पार्टी से जुड़ने का दावा भी किया।

जवाब देने के दौरान सीएम ने दिल्ली और यूपी के नेताओं की तुलना करते हुए कहा, “देश में दो ‘नमूने’ हैं, जिनमें से एक यहां बैठते हैं।” इस टिप्पणी ने सदन में उबाल बढ़ा दिया और सपा के कई विधायकों ने वॉकआउट कर दिया।

अखिलेश का पलटवार — किस ओर तंज?
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने X पर लिखा — “आत्म-स्वीकृति! किसी को उम्मीद नहीं थी कि दिल्ली-लखनऊ की लड़ाई यहां तक पहुंच जाएगी। संवैधानिक पदों पर बैठे लोग आपस में कुछ तो लोक-लाज रखें और मर्यादा की सीमा न लांघें। भाजपाई अपनी पार्टी के अंदर की खींचातानी को चौराहे पर न लाएं। कहीं कोई बुरा मान गया तो वापस जाना पड़ेगा।”

इस पोस्ट से साफ इशारा मिलता है कि अखिलेश ने केंद्र और यूपी सरकार के बीच संबंधों और पार्टी-अंदरूनी गतिशीलता पर तंज कसने की कोशिश की है। “भाजपाई अपनी पार्टी के अंदर की खींचातानी” वाली लाइन से वे यह दावा ठोक रहे हैं कि बीजेपी के भीतर सब ठीक नहीं और दिल्ली-लखनऊ राइवलरी का असर खुले मंचों तक पहुँच गया है। “कहीं कोई बुरा मान गया तो वापस जाना पड़ेगा” वाली बात भी सीएम के व्यक्तिगत छवि-नियंत्रण पर कटाक्ष जैसी लगती है — यह वही भाषा है जो अक्सर सपा की तरफ से सत्ता-व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य करने के लिए इस्तेमाल होती है।

सियासी प्रभाव और आगे की तस्वीर
आज की नोक-झोंक ने विधानसभा में राजनीतिक तकरार को और तीखा कर दिया है। सरकार कफ-सिरप मामले को कानून व्यवस्था और सख्ती के प्रदर्शन के रूप में पेश कर रही है, जबकि विपक्ष इसे सत्तापक्ष की आंतरिक खींचतान और केन्द्र-राज्य के पिंग-पाँग के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सदन के साथ-साथ सार्वजनिक बहस और सोशल मीडिया पर भी गरमाएगा।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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