Wednesday, February 11, 2026
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संसद में SIR पर तीखी बहस — प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस को दी सलाह, अमित शाह ने राहुल गांधी के दावों को खारिज किया

नई दिल्ली — देश की संसद में चुनाव सुधारों (SIR — Special Intensive Revision) पर लिव—लॉन्ग बहस के बीच केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद (प्रल्हाद) जोशी ने कांग्रेस पर करारा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस को «स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन» (SIR) की ज़रूरत है और वे राहुल गांधी व प्रियंका गांधी को छोड़कर पार्टी के बाकी सदस्यों को यही सलाह देंगे। जोशी का इशारा पार्टी के अंदर गहन सुधार की ज़रूरत की ओर था।

वहीं लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के वोट-चोरी के दावों का कड़ा खंडन करते हुए राहुल गांधी के हालिया तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस के उदाहरणों पर निराधार होने का आरोप लगाया। शाह ने हरियाणा के उस मामले का जिक्र किया जिसमें राहुल गांधी ने कहा था कि एक ही घर से 501 वोट दर्ज हैं — अमित शाह ने बताया कि मुद्दा घर नंबर 265 का है, जो किसी छोटे मकान का नहीं बल्कि एक एकड़ के भूखंड पर रहने वाले कई परिवारों का साझा नंबर है; इसलिए एक ही पता दर्ज होना प्राकृतिक है, न कि नकली वोट। शाह ने कहा कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि यह फर्जी घर या फर्जी वोट का मामला नहीं है।

लोकसभा में बहस के दौरान विपक्ष ने SIR पर सवाल उठाते हुए प्रक्रिया की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रभाव जानने की मांग की, जबकि सत्ता पक्ष का तर्क रहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण आवश्यक है — किसी भी लोकतंत्र में यदि मतदाता सूची गड़बड़ा दे तो चुनाव शुद्ध नहीं रहेंगे। गृह मंत्री ने बताया कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की सफाई, मृतक/डुप्लिकेट प्रविष्टियों का हटाना और हर नागरिक का एक ही स्थान पर वोट सुनिश्चित करना है।

इतिहास और पृष्ठभूमि — SIR (Special Intensive Revision) कोई नई परम्परा नहीं है। चुनाव आयोग और इतिहास के रिकॉर्ड के मुताबिक देश में सबसे पहला व्यापक मतदाता सूची पुनरीक्षण 1952 में हुआ था और उसके बाद कई बार intensive revisions कराए गए हैं; 2004 के बाद यह प्रक्रिया 2025 में एक बार फिर बड़े पैमाने पर लागू की जा रही है। सरकार का तर्क रहा कि 2004 तक किसी भी दल ने इस तरह के रिवीजन का विरोध नहीं किया क्योंकि यह चुनावों की पवित्रता बनाए रखने का एक साधन माना जाता रहा है।

बात बढ़ी तो थम भी नहीं रही — SIR के दायरे, तकनीकी औजारों (जैसे वोटर-मैपिंग ऐप) और enumeration के तरीके पर विपक्ष ने गहन सवाल उठाए — कुछ राज्यों में ऐप के काम न करने की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया के दौरान नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। वहीं आयोग ने कहा है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है।

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VIKAS TRIPATHI
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