Wednesday, February 11, 2026
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चुनाव सुधारों पर संसद में गरमाई बहस, उम्मीदवार की उम्र 18 वर्ष करने की मांग

संसद में चुनाव सुधारों को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच मंगलवार को शिवसेना नेता और कल्याण से सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु घटाने की जोरदार वकालत की। उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में प्रत्याशी बनने की वर्तमान न्यूनतम आयु 25 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने की मांग रखी। उनका तर्क था कि “जब 18 वर्ष का युवक वोट डालने के लिए योग्य माना जाता है, तो उसे चुनाव लड़ने का अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए?”

सांसद शिंदे ने प्रवासी भारतीयों और प्रवासी कामगारों के लिए रिमोट वोटिंग की व्यवस्था शुरू करने, सभी चुनावों के लिए कॉमन वोटर लिस्ट लागू करने तथा लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने जैसे व्यापक सुधारों की भी बात कही।


राजनीतिक विरोधियों पर तीखा हमला

तीसरी बार लोकसभा सदस्य बने श्रीकांत शिंदे ने महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में कई उम्मीदवारों के निर्विरोध जीतने के मुद्दे पर उन्होंने शिवसेना (UBT) पर पलटवार करते हुए कहा कि उनके नेता अपने ही कार्यकर्ताओं का साथ नहीं दे पाए।

उन्होंने आरोप लगाया, “लोकसभा चुनाव में जीत का दावा करने वाले UBT नेता पंचायत स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं को अकेला छोड़ देते हैं। यही वजह है कि महा विकास अघाड़ी—कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और NCP-SP—को 2024 के चुनाव में हार झेलनी पड़ी।”


सुप्रिया सुले का EC पर गंभीर आरोप

बहस के दौरान NCP-SP की सांसद सुप्रिया सुले ने चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था की बजाय “सरकार का विस्तार” जैसा व्यवहार करता दिख रहा है, जो किसी भी लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

सुले ने महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि शिवसेना के एक नेता की सूचना पर हुई कार्रवाई में BJP नेता के घर से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की गई थी। उन्होंने कहा कि 20 से अधिक निकायों में सत्ता पक्ष के नेताओं और मंत्रियों के रिश्तेदारों को निर्विरोध जीत मिली है।


बैलेट पेपर की वापसी की मांग

इस बहस में CPI(M) सांसद अमरा राम और RJD सांसद अभय कुमार सिन्हा ने भी EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई। दोनों नेताओं ने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बैलेट पेपर ही बेहतर विकल्प है। सिन्हा ने यह तक कहा कि बीजेपी को चाहिए कि वह अगले वर्ष होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराए।

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VIKAS TRIPATHI
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