2026 में अप्रैल, जून और नवंबर में राज्यसभा में एक बड़े पैमाने पर बदलाव की संभावना है: विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लगभग 72–75 सीटें खाली होंगी और कई वरिष्ठ नेता रिटायर होंगे। इससे राज्यसभा का समीकरण—विशेषकर एनडीए और विपक्ष की संख्या—कायदे से प्रभावित होने की उम्मीद है।
क्या, कब और कहाँ खाली होंगे सीटें
कई रिपोर्टों के मुताबिक अगले साल (2026) के दौरान 70 के आसपास राज्यसभा सीटें खाली होंगी और इनमें से अधिकांश सीटों पर चुनाव अप्रैल, जून और नवंबर 2026 में होंगे। कुछ स्रोत 75 सीटों का संकेत दे रहे हैं तो कुछ रिपोर्टों में 72-73 की संख्या भी दिखती है — यानी संख्या में मामूली अंतर है, पर कुल मिलाकर ऊपरी सदन में बड़े पैमाने पर बदलाव आने वाला है।
राज्यवार मुख्य खाली होने वाली सीटों का सार (प्रमुख रिपोर्ट्स के अनुसार):
अप्रैल 2026: ~37 सीटें (बिहार-5, पश्चिम बंगाल-5, तमिलनाडु-6, महाराष्ट्र-7, ओडिशा-4, तेलंगाना-2, असम-3, आदि)।
जून 2026: ~25 सीटें (आंध्र-4, गुजरात-4, कर्नाटक-4, मध्य प्रदेश-3, राजस्थान-3, झारखंड-2, पूर्वोत्तर-कुछ)।
नवंबर 2026: उत्तर प्रदेश की 10 सीटें सबसे नज़दीकी महत्त्व रखती हैं (स्रोतों के अनुसार)।
किन दिग्गजों का कार्यकाल खत्म होगा
कई वरिष्ठ नेता—कांग्रेस, राकांपा, JDU, अन्य दलों और राष्ट्रपति नामित सदस्य—का कार्यकाल 2026 में समाप्त होगा। प्रमुख नामों में मल्लिकार्जुन खरगे, एचडी देवगौड़ा, दिग्विजय सिंह, शरद पवार, शिबू सोरेन, हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, रवनीत सिंह बिट्टू, जॉर्ज कुरियन, हरिवंश नारायण सिंह, रंजन गोगोई (नॉमिनेटेड) इत्यादि शामिल बताए जा रहे हैं। यह सूची मीडिया रिपोर्ट्स में संकलित की गई है।
राजनीतिक असर — क्या एनडीए को बढ़त मिलेगी?
राज्यसभा के लिए चुनाव विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा (STV) होते हैं। इसलिए जो भी पार्टी या गठबंधन राज्य विधानसभाओं में मजबूत होगा, उसे राज्यसभा की उन जगहों पर बढ़त मिलने की संभावनाएँ बढ़ जाएँगी। हालिया विधानसभा नतीजों और राज्यों की सत्ता-स्थिति को देखते हुए कई विश्लेषक मानते हैं कि एनडीए को कुल मिलाकर कुछ सीटों की बढ़त मिल सकती है—खासकर बिहार जैसे राज्यों में जहां हालिया विधानसभा नतीजे एनडीए के पक्ष में रहे हैं। कुछ रिपोर्टें यह आकलन भी कर रही हैं कि 2026 के चुनावों में एनडीए को लगभग ४–५ सीटें बढ़ाने का मौका मिल सकता है, पर ये अनुमान राज्यों के राजनीतिक समीकरण पर निर्भर करेंगे।
उदाहरण:
बिहार: अप्रैल 2026 में बिहार की 5 सीटें खाली होंगी; विधानसभा में एनडीए की बढ़त के कारण मीडिया-विश्लेषण में कहा जा रहा है कि इनमें से 4-5 सीटें एनडीए के खाते में जा सकती हैं। इससे RJD जैसी विरोधी पार्टियों की राज्यसभा प्रतिनिधित्व पर असर पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश: नवंबर 2026 में खाली होने वाली 10 सीटें अहम हैं — विधानसभा के वर्तमान समीकरण के हिसाब से बीजेपी/एनडीए के पास यहां अधिक सीटें मिलने के अनुमान हैं, पर कुछ सीटों पर कड़ा मुकाबला भी दिखाई देता है।
क्या विपक्ष कमजोर होगा? — नज़दीकी इम्पैक्ट और अनिश्चितताएँ
अगर एनडीए को अनुमानित सीटें मिलती हैं तो राज्यसभा में सरकार के लिए विधेयक पारित करवाना आसान होगा — खासकर जहाँ विपक्ष की संख्या पहले से कमज़ोर है। पर यह तय नहीं है कि हर वह सीट जो वर्तमान में विपक्ष के पास है, स्वचालित रूप से एनडीए को मिल जाएगी; स्थानीय राजनीतिक समीकरण, दलगत समझौते और कभी-कभी अप्रत्याशित प्रत्याशी-समर्थन भी नतीजे बदल सकते हैं।
एक और महत्वपूर्ण बिंदु: कुछ बड़े नेतागण रिटायर हो रहे हैं — उनकी जगह कौन-कौन आएगा, क्या पुराने चेहरों की वापसी होगी, या नई नियुक्तियाँ होंगी — यह भी दिशा तय करेगा। राजनीतिक गठबंधन, समझौते और नॉमिनेशन-कठिनाइयाँ भविष्य के समीकरण तय करेंगी।
क्या बदलना तैय है?
बड़ा बदलाव संभावित है, पर पूर्ण तैय नहीं। 2026 की राज्यसभा बाय-इलेक्शंस/बाय-नॉमिनेशन का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अगल-बगल के राज्यों में विधानसभा-संतुलन क्या रहेगा और किस तरह के समझौते होंगे। मीडिया-विश्लेषण फिलहाल बताता है कि एनडीए के हाथ में मौका है और वह 4-5 सीटें जोड़ सकता है — पर अंतिम चित्र विधानसभा सांसदों की वोटिंग और प्रत्याशी-रणनीति के बाद ही स्पष्ट होगा














