पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर जताई गई नाराजगी ने राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. राष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर असंतोष व्यक्त करते हुए इशारों-इशारों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर सवाल उठाए. वहीं इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार की कड़ी आलोचना की है, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है.
कार्यक्रम स्थल को लेकर उठा विवाद
दरअसल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को सिलीगुड़ी के बागडोगरा क्षेत्र के गोशाईपुर में आयोजित 9वें इंटरनेशनल संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पहुंचीं थीं. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच से यह सवाल उठाया कि सभा में कई कुर्सियां खाली क्यों हैं.
बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम का आयोजन पहले सिलीगुड़ी सबडिवीजन के बिधाननगर में किया जाना था, लेकिन बाद में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कार्यक्रम का स्थल कई बार बदला गया. अंततः प्रशासन ने बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोशाईपुर में कार्यक्रम की अनुमति दी.
आयोजकों का आरोप है कि स्थल बदलने और सुरक्षा पास न मिलने के कारण कई आमंत्रित लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके. पुलिस ने भी कई लोगों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से रोक दिया, जिसके कारण कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ नहीं पहुंच पाई.
This is shameful and unprecedented. Everyone who believes in democracy and the empowerment of tribal communities is disheartened.
The pain and anguish expressed by Rashtrapati Ji, who herself hails from a tribal community, has caused immense sadness in the minds of the people… https://t.co/XGzwMCMFrT
— Narendra Modi (@narendramodi) March 7, 2026
राष्ट्रपति ने जताई नाराजगी
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि प्रशासन ने कार्यक्रम के लिए ऐसी जगह क्यों चुनी जहां बड़ी संख्या में लोग नहीं पहुंच सके. उन्होंने कहा कि बिधाननगर का स्थान काफी बड़ा था और वहां लाखों लोग आसानी से इकट्ठा हो सकते थे.
राष्ट्रपति ने कहा, “मैं भी बंगाल की बेटी हूं. ममता मेरी छोटी बहन जैसी हैं, लेकिन शायद वह मुझसे नाराज हैं, इसलिए मुझे यहां आने की अनुमति नहीं मिली.” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात से कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है, लेकिन उन्हें दुख है कि संथाल समुदाय के कई लोग इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए.
इसके बाद राष्ट्रपति बिधाननगर भी गईं, जहां पहले कार्यक्रम आयोजित होने वाला था. वहां उन्होंने पूरे इलाके का निरीक्षण किया और प्रतीकात्मक रूप से एक साल का पेड़ भी लगाया.
प्रोटोकॉल को लेकर भी उठे सवाल
राष्ट्रपति के बयान के दौरान यह भी चर्चा में आया कि कार्यक्रम में राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री या कोई कैबिनेट मंत्री मौजूद नहीं था. हालांकि स्थानीय प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रपति के स्वागत के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी मौजूद थे.
सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब ने कहा कि उन्होंने राज्य सरकार की ओर से राष्ट्रपति का स्वागत किया था और कार्यक्रम में जिला मजिस्ट्रेट तथा पुलिस आयुक्त भी मौजूद थे. उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा कारणों की वजह से कार्यक्रम स्थल को लेकर कुछ प्रशासनिक कठिनाइयां थीं.
पीएम मोदी ने की कड़ी आलोचना
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की TMC सरकार की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के साथ ऐसा व्यवहार “शर्मनाक” है और इससे देश के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समुदाय से आती हैं और उनके साथ इस तरह की लापरवाही आदिवासी समाज का भी अपमान है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर होता है और इसकी गरिमा का सम्मान हर हाल में किया जाना चाहिए.
#WATCH | Kolkata | On President Droupadi Murmu’s statement, West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee says, “Before commenting on West Bengal, you should see the condition of the BJP-ruled states… It is not right to comment after listening to just one political party…” https://t.co/o4RnIHJeuf pic.twitter.com/S5sR2zros7
— ANI (@ANI) March 7, 2026
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार को इस मामले में आत्ममंथन करना चाहिए और भविष्य में ऐसे हालात से बचना चाहिए.
ममता बनर्जी का पलटवार
प्रधानमंत्री के बयान और विवाद के बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर हैं और उन्हें चुनाव के समय किसी राजनीतिक विवाद में नहीं पड़ना चाहिए.
ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने आदिवासी समुदाय के लिए कई महत्वपूर्ण काम किए हैं, जिनमें संथाली और अलचिकी भाषा को बढ़ावा देना भी शामिल है. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति को बंगाल के बारे में टिप्पणी करने से पहले अन्य राज्यों में आदिवासियों की स्थिति भी देखनी चाहिए.
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय इस तरह के मुद्दों को राजनीतिक रूप दिया जा रहा है और इसे भाजपा के इशारे पर किया जा रहा है.
राजनीति में तेज हुआ विवाद
राष्ट्रपति के बयान, प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया और मुख्यमंत्री के पलटवार के बाद यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन गया है. विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं.
फिलहाल यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई गर्माहट लेकर आया है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है.














