Monday, March 30, 2026
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यूपी में DGP का सर्कुलर जारी 31 मामलों में अब सीधे FIR नहीं, पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट में देनी होगी शिकायत

लखनऊ:उत्तर प्रदेश में अब 31 प्रकार के मामलों में पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज नहीं करेगी। इसके लिए पीड़ितों को पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट में परिवाद (शिकायत) दायर करनी होगी। यह नया निर्देश प्रदेश के डीजीपी Rajeev Krishna ने जारी किया है। यह फैसला Allahabad High Court की हालिया टिप्पणी के बाद लिया गया है, जिसमें अदालत ने नियमों के विपरीत दर्ज की जा रही एफआईआर पर कड़ी नाराजगी जताई थी।

पुलिस को जारी हुआ सख्त सर्कुलर

डीजीपी राजीव कृष्ण ने प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों को सर्कुलर जारी करते हुए निर्देश दिया है कि जिन मामलों में कानून के अनुसार सिर्फ कोर्ट में परिवाद दायर करने का प्रावधान है, उनमें पुलिस द्वारा सीधे एफआईआर दर्ज करना पूरी तरह गलत और अवैध माना जाएगा। थाना प्रभारी और विवेचक को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित मामले में कोर्ट पुलिस रिपोर्ट के आधार पर संज्ञान ले सकती है या नहीं।

इन मामलों में नहीं दर्ज होगी सीधे FIR

डीजीपी के सर्कुलर में उन 31 मामलों की सूची भी शामिल है, जिनमें अब सीधे पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं की जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से—

दहेज उत्पीड़न

घरेलू हिंसा

चेक बाउंस (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट)

भ्रूण हत्या

जानवरों के साथ क्रूरता

पर्यावरण और वायु/जल प्रदूषण

उपभोक्ताओं से धोखाधड़ी

खाद्य पदार्थों में मिलावट

बाल श्रम

ट्रेडमार्क उल्लंघन

मानव अंग तस्करी

कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न

केबल टेलीविजन नेटवर्क से जुड़े मामले

विदेशी मुद्रा प्रबंधन

कीटनाशक और दवाओं के नियंत्रण से जुड़े मामले शामिल हैं।

नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

डीजीपी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई पुलिस अधिकारी इन निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सभी थाना प्रभारियों को कानून के प्रावधानों का गंभीरता से अध्ययन करने और हर मामले की जांच के बाद ही एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद लिया गया फैसला

दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हाल ही में कहा था कि कई बार पुलिस नियमों के विपरीत एफआईआर दर्ज कर लेती है, जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित होती है और अदालत में आरोपियों को फायदा मिल जाता है। इसी टिप्पणी के बाद यूपी पुलिस ने यह नया सर्कुलर जारी किया है।

दहेज कानून का भी उल्लेख

सर्कुलर में दहेज निषेध अधिनियम, 1961 का भी जिक्र किया गया है, जिसके तहत दहेज लेने, देने या उसमें सहयोग करने पर 5 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, दहेज के लिए मारपीट या उत्पीड़न के मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 498A के तहत 3 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह कदम झूठी या बेबुनियाद शिकायतों पर सीधे एफआईआर दर्ज होने की प्रवृत्ति को रोकने और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। अब पीड़ितों को पहले मजिस्ट्रेट के सामने शिकायत दर्ज करनी होगी, जिसके बाद प्रारंभिक जांच के आधार पर मामला आगे बढ़ेगा। हालांकि, संज्ञेय अपराधों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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