Saturday, January 31, 2026
Your Dream Technologies
HomePARDAFHAAS BREAKINGयुवराज मौत मामला: SIT जांच में अधिकारियों के दावे झूठे निकले, लापरवाही...

युवराज मौत मामला: SIT जांच में अधिकारियों के दावे झूठे निकले, लापरवाही और तंत्र की विफलता उजागर

नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की जांच ने प्रशासनिक तंत्र की गंभीर लापरवाही को सामने ला दिया है। तकनीकी जांच, लिखित जवाबों और बयानों के मिलान में कई अधिकारियों के दावे गलत साबित हुए हैं, जिससे पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जवाबों और बयानों में विरोधाभास

SIT के समक्ष नोएडा प्राधिकरण, पुलिस, अग्निशमन विभाग और प्रशासन के अधिकारियों ने लिखित जवाब दिए और बाद में मौखिक बयान दर्ज कराए। तकनीकी रिपोर्ट से मिलान करने पर कई अधिकारियों के घटना स्थल पर पहुंचने के समय और दावों में बड़ा अंतर सामने आया। कुछ अधिकारी जिन्होंने अगले दिन मौके पर पहुंचने का दावा किया, वे दो दिन तक वहां नहीं गए, जबकि जांच की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी तीन दिन तक सेक्टर-150 नहीं पहुंचे।

सुरक्षा उपायों का अभाव और बचाव में देरी

जांच में यह भी सामने आया कि जिस प्लॉट में युवराज की कार गिरी, वहां बेसमेंट की खोदाई के बाद लंबे समय तक जलभराव बना रहा और कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत नहीं लगाए गए। हादसे के बाद भी समय रहते प्रभावी बचाव कार्य नहीं किया गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

‘कार नहीं डूबेगी’ मानकर टलता रहा फैसला

SIT की पड़ताल में सामने आया कि कई जिम्मेदार अधिकारी देर तक यह मानते रहे कि युवराज की कार पूरी तरह नहीं डूबेगी और उसे आसानी से निकाल लिया जाएगा। इसी भ्रम और निर्णय में देरी ने एक बहुमूल्य जान छीन ली।

अब किस पर गिरेगी गाज?

हालांकि मुख्यमंत्री द्वारा नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को हटाए जाने के बाद सख्त कार्रवाई का संदेश दिया गया था, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह आशंका भी जताई जा रही है कि जांच के अंतिम चरण में बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के बजाय कुछ जूनियर स्तर के कर्मचारियों पर ही कार्रवाई कर मामले को सीमित किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह पहली बार नहीं होगा जब सिस्टम की नाकामी का ठीकरा निचले स्तर के स्टाफ पर फोड़ा जाएगा और ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारी बच निकलेंगे।

“सूत्र बताते हैं कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में भी वही पुराना पैटर्न दोहराए जाने की आशंका है, जिसमें जांच के अंत में बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने से बचते हुए कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों को ‘बलि का बकरा’ बनाकर सिस्टम की सामूहिक विफलता पर पर्दा डाल दिया जाता है”

नीचे तक तय होनी है जिम्मेदारी

SIT ने संकेत दिए हैं कि अपनी रिपोर्ट में प्राधिकरण, पुलिस और बचाव एजेंसियों की जिम्मेदारी स्तरवार तय की जाएगी। अब देखना होगा कि जांच वास्तव में जवाबदेही तय करती है या फिर पुराने ढर्रे पर चलते हुए कुछ कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर मामला निपटा दिया जाता है।

चश्मदीद का बयान

घटना के चश्मदीद डिलीवरी बॉय मोनिंदर का शनिवार को SIT के सामने बयान दर्ज किया गया। कई घंटे चली पूछताछ के बाद वह पुलिस सुरक्षा में बाहर निकले। उनके परिजनों ने कहा कि मोनिंदर ने जांच में वही कहा जो उसने अपनी आंखों से देखा।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button