कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के साथ चुनावी मैदान में उतरकर सियासी हलचल तेज कर दी है। उन्होंने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी राज्य की 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ भी उम्मीदवार उतारेगी।
पहली सूची जारी, पूरी लिस्ट रविवार को
बुधवार को पार्टी ने 15 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की, जिसमें खास तौर पर मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल जिलों पर फोकस किया गया है। कबीर ने बताया कि पूरी उम्मीदवार सूची रविवार दोपहर तक जारी कर दी जाएगी। उनकी रणनीति इन इलाकों में खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करने की है।
भवानीपुर में ममता को सीधी चुनौती
सबसे दिलचस्प मुकाबला भवानीपुर सीट पर देखने को मिल सकता है, जहां हुमायूं कबीर ने पूनम बेगम को उम्मीदवार बनाया है। यह सीट ममता बनर्जी का गढ़ मानी जाती है। यहां मुख्य मुकाबला आमतौर पर ममता बनर्जी और बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी के बीच होता है, लेकिन अब तीसरे उम्मीदवार के उतरने से मुकाबला और रोमांचक हो गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ‘मुस्लिम वोट बैंक’ में सेंध लगाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
दो सीटों से मैदान में कबीर
हुमायूं कबीर खुद मुर्शिदाबाद की रेजिनगर और नाओदा सीटों से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने अपनी पुरानी भरतपुर सीट को छोड़ दिया है। दो सीटों से चुनाव लड़ना उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने या जोखिम को कम करने की रणनीति माना जा रहा है।
AIMIM से गठबंधन के संकेत
कबीर ने संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी AIMIM के साथ कुछ सीटों पर गठबंधन कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो राज्य की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है।
दो चरणों में मतदान
पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में होंगे:
23 अप्रैल: पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान
29 अप्रैल: दूसरे चरण में 142 सीटों पर मतदान
4 मई: मतगणना और परिणाम
हुमायूं कबीर की नई पार्टी का चुनावी मैदान में उतरना न सिर्फ मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकता है, बल्कि खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में वोट समीकरण को भी प्रभावित कर सकता है। अब देखना होगा कि यह नई राजनीतिक ताकत कितनी असरदार साबित होती है और क्या यह ममता बनर्जी के मजबूत किले में सेंध लगा पाती है।














