Friday, April 10, 2026
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अमेरिका-ईरान सीजफायर का जम्मू-कश्मीर में स्वागत: महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान की भूमिका सराही, फारूक अब्दुल्ला बोले—‘युद्ध नहीं, संवाद ही समाधान’

अमेरिका और ईरान के बीच घोषित सीजफायर को लेकर जम्मू-कश्मीर के प्रमुख नेताओं और अलगाववादी संगठनों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। नेताओं ने इस युद्धविराम को शांति की दिशा में अहम कदम बताते हुए उम्मीद जताई कि यह अस्थायी न रहकर स्थायी समाधान की ओर बढ़ेगा।

पीडीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इसे “मुबारक दिन” बताते हुए कहा कि हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में जो तनाव बना हुआ था, वह वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन गया था। उन्होंने कहा कि हालात इतने गंभीर हो गए थे कि यह संघर्ष विश्व युद्ध की दिशा में बढ़ता नजर आ रहा था।

पाकिस्तान की भूमिका की तारीफ

महबूबा मुफ्ती ने इस सीजफायर में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान का योगदान अहम रहा है और उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने क्षेत्र और दुनिया को बड़े युद्ध से बचाने में भूमिका निभाई।

उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भारत और पाकिस्तान को भी आपसी मतभेद भुलाकर बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच संवाद ही आगे का रास्ता है।

संवाद को प्राथमिकता देने की अपील

अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने भी सीजफायर का स्वागत करते हुए कहा कि टकराव की जगह संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह युद्धविराम शांति की दिशा में सकारात्मक कदम है और सभी पक्षों को इसे आगे बढ़ाना चाहिए।

‘युद्ध कभी समाधान नहीं’—फारूक अब्दुल्ला

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने अमेरिका और ईरान को बधाई देते हुए कहा कि युद्ध कभी किसी समस्या का समाधान नहीं रहा है और न ही कभी होगा। उन्होंने कहा कि बातचीत ही एकमात्र रास्ता है जिससे स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है।

अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि यदि यह युद्ध और लंबा चलता, तो वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और गहरा सकता था, जिसका असर भारत और खासकर जम्मू-कश्मीर के लोगों पर भी पड़ता। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में काम कर रहे कश्मीरी नागरिक भी इस तनाव से प्रभावित हुए हैं।

भारत की भूमिका पर उम्मीद

फारूक अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि भारत भी इस क्षेत्र में तनाव कम करने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि भारत के अमेरिका के साथ अच्छे संबंध हैं, ऐसे में वह शांति बहाली के प्रयासों में सहयोग कर सकता है।

कुल मिलाकर, जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व ने इस सीजफायर को राहत की खबर मानते हुए इसे स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ाने की अपील की है।

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VIKAS TRIPATHI
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