नई दिल्ली, 17 फरवरी। धोखाधड़ी के एक मामले में जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान मंगलवार को Supreme Court of India में असामान्य स्थिति पैदा हो गई, जब याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि उनका मुवक्किल प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश Vanuatu का नागरिक है। इस पर पीठ ने वानुअतु के अस्तित्व पर ही सवाल उठा दिए और उसकी तुलना स्वयंभू धर्मगुरु Nithyananda द्वारा घोषित ‘United States of Kailasa’ से कर दी। अंततः याचिका वापस लेने की अनुमति के साथ खारिज कर दी गई।
हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती
मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ कर रही थी। आरोपी ने Calcutta High Court के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे एक कथित धोखाधड़ी मामले में जमानत देने से इनकार किया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि उनका मुवक्किल करीब एक वर्ष तीन महीने से हिरासत में है। इस पर पीठ ने आरोपी की नागरिकता के बारे में पूछा। जवाब में दवे ने कहा कि उनका मुवक्किल वानुअतु का नागरिक है।
‘ऐसा कोई देश नहीं है…’
वकील के इस दावे पर पीठ ने आश्चर्य जताते हुए पूछा कि क्या वे कभी वानुअतु गए हैं। नकारात्मक उत्तर मिलने पर पीठ ने टिप्पणी की, “ऐसा कोई देश नहीं है। हम एक देश कैलासा के बारे में भी जानते हैं, उसी जैसा।” अदालत की यह टिप्पणी हल्के-फुल्के अंदाज में की गई, लेकिन इससे कोर्टरूम में असामान्य माहौल बन गया।
दरअसल, ‘यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ कैलासा’ का दावा 2019 में नित्यानंद ने किया था, जिसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त नहीं है। इसके विपरीत, वानुअतु एक वास्तविक संप्रभु राष्ट्र है, जो संयुक्त राष्ट्र और कॉमनवेल्थ का सदस्य है तथा दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित है।
‘कैरिबियन में कहीं है’—भौगोलिक भ्रम
जब पीठ ने देश की भौगोलिक स्थिति पूछी तो वकील ने कहा कि वानुअतु “कैरिबियन में कहीं” स्थित है। हालांकि यह जानकारी तथ्यात्मक रूप से गलत है, क्योंकि वानुअतु दक्षिण प्रशांत महासागर में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व में स्थित एक द्वीपीय राष्ट्र है, न कि कैरिबियन क्षेत्र में।
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि आरोपी ने कथित रूप से कई अलग-अलग पहचानों का इस्तेमाल किया था। इस पर जस्टिस मेहता ने टिप्पणी की कि “हमें इस व्यक्ति पर शोध करने का विचार करना चाहिए।”
छह से आठ महीने में ट्रायल पूरा होने की संभावना
पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील से पूछा कि मुकदमे की सुनवाई पूरी करने में कितना समय लगेगा। सरकारी पक्ष ने बताया कि ट्रायल छह से आठ महीने में पूरा हो सकता है।
इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। पीठ ने इसे स्वीकार करते हुए याचिका को “वापस लेने के रूप में खारिज” कर दिया।
कानूनी और तथ्यात्मक पहलू
यह प्रकरण अदालत में नागरिकता के दावे, भौगोलिक जानकारी और आरोपी की पहचान को लेकर उठे सवालों के कारण चर्चा में रहा। जहां ‘कैलासा’ एक स्वयंघोषित इकाई है, वहीं वानुअतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त देश है। सुनवाई के दौरान हुई टिप्पणियों ने मामले को असामान्य मोड़ दे दिया, लेकिन अंततः अदालत ने विधिक प्रक्रिया के तहत याचिका का निस्तारण कर दिया।














