इंडिगो एयरलाइन की लगातार रद्द और देरी से चल रही उड़ानों के मुद्दे पर दाखिल जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि “अगर स्थिति यथावत बनी रहती तो न्यायालय हस्तक्षेप करता, लेकिन सरकार इस मामले पर ध्यान दे रही है। इसलिए उसे इसे संभालने दिया जाए।”
याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत वकील ने कोर्ट को बताया कि पिछले सात दिनों में 2,500 से अधिक उड़ानें प्रभावित हुई हैं और 95 हवाई अड्डे इससे प्रभावित हैं, जिसके कारण लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लगातार सातवें दिन रद्द हो रहीं उड़ानें
इंडिगो की उड़ानें सातवें दिन भी बड़ी संख्या में रद्द हुईं।
दिल्ली एयरपोर्ट पर 134 उड़ानें रद्द की गईं (75 प्रस्थान और 59 आगमन)।
बेंगलुरु एयरपोर्ट पर 127 उड़ानें रद्द होने की पुष्टि हुई।
एयरलाइन ने उड़ानों के रद्द होने का कारण पायलटों के लिए लागू किए गए नए FDTL (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन) नियमों को बताया है। वहीं, याचिका में इस योजना को “खराब ढंग से लागू” बताया गया और कहा गया कि ऐसी व्यापक रद्दीकरण प्रक्रिया अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
सीजेआई के घर पहुंचकर की थी तत्काल सुनवाई की मांग
इंडिगो उड़ानों के संकट को देखते हुए याचिकाकर्ता के वकील 6 दिसंबर को देर शाम सीजेआई सूर्यकांत के आवास पर पहुंचे थे और मामले की तुरंत सुनवाई की अपील की थी। हालांकि, कोर्ट ने वर्तमान परिस्थितियों में जल्दबाजी से इनकार कर दिया।
डीजीसीए की सख्ती—सीईओ को जारी हुआ नोटिस
वहीं, डीजीसीए ने इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीटर एल्बर्स और जवाबदेही प्रबंधक इस्द्रो पोर्क्वेरास को नोटिस जारी करते हुए आज शाम 6 बजे तक विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है। नियामक ने चेतावनी दी है कि समय पर संतोषजनक स्पष्टीकरण न देने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
यात्रियों की बढ़ती मुश्किलें
लगातार रद्द और विलंबित उड़ानों से देशभर के हवाई अड्डों पर यात्रियों की भारी भीड़ और अव्यवस्था देखने को मिल रही है। कई यात्री घंटों फंसे हुए हैं और कोई वैकल्पिक व्यवस्था न मिलने के कारण परेशान हैं। याचिका में प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक यात्रा प्रबंध और मुआवजे की मांग भी की गई है।














