नई दिल्ली। दिल्ली की कथित आबकारी नीति घोटाले मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों को बरी किए जाने के बाद राजधानी की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस फैसले को ‘क्लीन चिट’ मानने से साफ इनकार करते हुए कहा कि यह अंतिम निर्णय नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया का एक चरण मात्र है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत का फैसला न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और मामला अभी उच्च अदालतों में जा सकता है। उन्होंने कहा कि “जमानत या निचली अदालत से राहत मिलना क्लीन चिट नहीं होता। अंतिम सच्चाई न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।”
आबकारी नीति मामला: क्या है पृष्ठभूमि?
दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति लागू होने के बाद कथित तौर पर लाइसेंसिंग ढांचे और मुनाफे की संरचना में बदलाव किए गए थे। आरोप है कि इन बदलावों से कुछ निजी पक्षों को अनुचित लाभ पहुंचा और सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ। जांच एजेंसियों ने इस मामले में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई थी।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने सबूतों और दलीलों पर विचार करते हुए सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया। हालांकि, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि इससे पूरे मामले का पटाक्षेप नहीं हो जाता।
‘क्लीन चिट नहीं’—सीएम ने उठाए सीधे सवाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली की जनता को कुछ मूलभूत सवालों के जवाब मिलना चाहिए:
थोक मुनाफा 5% से बढ़ाकर 12% क्यों किया गया?
इस निर्णय से वास्तविक लाभ किसे हुआ?
लाइसेंस संरचना में ऐसे परिवर्तन किन परिस्थितियों में किए गए?
इन बदलावों के पीछे नीति-निर्माण की पारदर्शिता कितनी थी?
उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 200 दिनों की अवधि में 160 से 170 मोबाइल फोन बदले जाने की बात जांच में सामने आई। “इतनी बड़ी संख्या में फोन बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? यदि छिपाने जैसा कुछ नहीं था तो डिजिटल रिकॉर्ड को लेकर संदेह क्यों पैदा हुए?” मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सवाल अपने आप में गंभीरता दर्शाते हैं।
न्यायपालिका पर भरोसा, लेकिन जवाबदेही जरूरी
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार न्यायपालिका का पूर्ण सम्मान करती है और अदालतों के निर्णयों का आदर करती है। लेकिन साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने उल्लेख किया कि सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने पूर्व आदेशों में इस मामले को गंभीर बताया था और बड़े पैमाने पर धन-लेनदेन के प्रथम दृष्टया संकेतों का जिक्र किया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, “जमानत और दोषमुक्ति दो अलग-अलग कानूनी अवस्थाएं हैं। कानूनी प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है।”
CAG रिपोर्ट और राजस्व नुकसान का मुद्दा
मुख्यमंत्री ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें हजारों करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान का उल्लेख है। उन्होंने कहा, “यह पैसा दिल्ली की जनता का है। यदि जनता के हितों को नुकसान पहुंचा है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई स्वयं को ‘कट्टर ईमानदार’ बताता है, तो उसे जांच से भागने या समन को नजरअंदाज करने के आरोपों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए। “ईमानदार व्यक्ति सवालों से भागता नहीं, बल्कि उनका सामना करता है,” उन्होंने कहा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की राह
मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि दिल्ली की जनता अपना राजनीतिक फैसला पहले ही दे चुकी है। अब न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और उच्च अदालतें साक्ष्यों की दोबारा जांच करेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि अंतिम सत्य सामने आएगा और कानून से ऊपर कोई नहीं है।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के समर्थक इस फैसले को बड़ी राहत और न्याय की जीत बता रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में दिल्ली की राजनीति को और गरमा सकता है।
अंतिम फैसला अभी शेष
राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले से फिलहाल अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों को राहत जरूर मिली है, लेकिन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उच्च अदालतों में संभावित अपील, साक्ष्यों की समीक्षा और न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण इस मामले की दिशा तय करेंगे।
राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से संवेदनशील इस प्रकरण में सबकी निगाहें अब उच्च न्यायालय की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं।














