वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा से जुड़े विवाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को उबाल पर ला दिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) और प्रशासन के बीच शनिवार (25 जनवरी) को दिनभर तनातनी की स्थिति बनी रही। सपा सांसदों और नेताओं को घाट पर जाने से रोके जाने के बाद मामला धरना-प्रदर्शन और सियासी आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया।
सुबह से ही बनारस को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। मणिकर्णिका घाट जाने वाले सभी रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, जबकि आसपास के जिलों में भी प्रशासन अलर्ट मोड में दिखा। सपा के चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह को दर्जनों कार्यकर्ताओं के साथ भोजूबीर इलाके में पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद सांसद अपने समर्थकों के साथ वहीं धरने पर बैठ गए।
इसी तरह बलिया से सपा सांसद सनातन पाण्डेय को गाजीपुर में रोक लिया गया, जहां उन्होंने भी धरना दिया। मलदहिया चौराहे से सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। इससे पहले ही शनिवार रात को सपा के कई नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गया था, जबकि पार्टी ने एक सप्ताह पहले ही प्रशासन को मणिकर्णिका जाने की सूचना दे दी थी।
अखिलेश यादव का हमला
इस पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “बीजेपी सरकार सच से डर रही है। अहिल्याबाई होल्कर जैसी महान शासिका की प्रतिमा से जुड़ी सच्चाई छुपाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने वाले जनप्रतिनिधियों को रोका जा रहा है। यह संविधान और लोकतंत्र दोनों का अपमान है।”
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि,“पीडीए समाज के महापुरुषों के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समाजवादी पार्टी अन्याय के खिलाफ सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।”
ये भाजपाई अहंकार का भूकंप है जो मंदिरों को ध्वस्त कर रहा है और पूज्य वृक्षों की जड़ें उखाड़ रहा है। कोई इतना अत्याचारी और निर्दयी कैसे हो सकता है।
अब वो समय आ गया है कि हर देशप्रेमी को मिलकर हर भाजपाई के घर, दुकान, दफ़्तर जाकर दरवाज़ा खटखटाकर पूछना होगा कि क्या वो भी भाजपाई… pic.twitter.com/BvpBRCg765
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) January 25, 2026
सपा का आरोप: तानाशाही रवैया
सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है और जानबूझकर सच्चाई सामने नहीं आने दी जा रही। वहीं सांसद सनातन पाण्डेय ने आरोप लगाया कि प्रशासन की कार्रवाई यह साबित करती है कि सरकार मणिकर्णिका घाट से जुड़ी हकीकत छुपाना चाहती है।
‘एआई’ है या ‘सच्चाई’… सपा का डेलीगेशन बस यही जानने काशी गया है। उसको रोकना चोर की दाढ़ी में तिनका है।
भाजपा विनाश का दूसरा नाम है। pic.twitter.com/jBybNyzOMo
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) January 25, 2026
प्रशासन की सफाई
एडीसीपी नीतू कादयान ने मीडिया को बताया कि शुरुआत में सपा के छह नेताओं को मणिकर्णिका जाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन बाद में बड़ी संख्या में लोगों को बुलाने की सूचना मिली, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी। इसी वजह से अनुमति वापस ली गई।
BJP का पलटवार
बीजेपी ने सपा के विरोध को “चुनावी स्टंट” बताया है। योगी सरकार में मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने कहा,“समाजवादी पार्टी का ये सब ड्रामा है। इन्हें अचानक मंदिरों और हिंदू धरोहरों से प्रेम हो गया है। ये वही लोग हैं जो काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भी विरोध कर रहे थे।”
धनगर समाज में आक्रोश
मणिकर्णिका घाट पर प्रतिमा और घाट के हिस्से को नुकसान पहुंचने के विरोध में धनगर समाज के लोगों ने भी प्रदर्शन किया। दिल्ली कूच कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने डैंपियर नगर में रोक लिया और कुछ नेताओं को हिरासत में लेकर बाद में छोड़ दिया।
सियासी मायने
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मणिकर्णिका घाट का विवाद अब धरोहर से ज्यादा वोट बैंक की राजनीति से जुड़ता जा रहा है। विश्लेषक विजय नारायण का कहना है कि पाल-धनगर-गड़रिया समाज करीब 30 विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका में है और सपा इस मुद्दे के जरिए इन्हें साधने की रणनीति पर काम कर रही है।














