नई दिल्ली/वाराणसी। असदुद्दीन ओवैसी ने वाराणसी में नाव पर रोजा खोलने वाले मुस्लिम युवाओं की गिरफ्तारी को लेकर प्रशासन की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर गंगा नदी में कोई खाना खाता है, तो इससे किसी की धार्मिक भावनाएं कैसे आहत हो सकती हैं।
वाराणसी घटना पर सवाल
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि वाराणसी में 14 मुस्लिम युवाओं ने नाव पर इफ्तार किया, जिसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण कार्रवाई बताते हुए कहा, “उनका एकमात्र गुनाह यह है कि वे मुसलमान हैं।”
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गंगा में सीवेज का कचरा गिरने से किसी की भावनाएं आहत नहीं होतीं, लेकिन रोजा खोलने से हो जाती हैं। उन्होंने प्रशासन से पूछा कि आखिर किसकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
धार्मिक मुद्दों पर तीखी टिप्पणी
ओवैसी ने रमजान के दौरान शराब की दुकानों के खुले रहने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि धार्मिक भावनाओं की बात होती है, तो इन पहलुओं पर भी समान संवेदनशीलता दिखाई जानी चाहिए।
युवाओं और बेरोजगारी पर बयान
असदुद्दीन ओवैसी ने देश के युवाओं, खासकर हिंदू युवाओं से अपील करते हुए कहा कि बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में ग्रेजुएट युवा बेरोजगार हैं, लेकिन उनके दिमाग में नफरत भरी जा रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को असली मुद्दों से भटकाया जा रहा है।
दिल्ली के उत्तम नगर का जिक्र
ओवैसी ने उत्तम नगर, दिल्ली का भी जिक्र किया, जहां कथित तौर पर ईद मनाने को लेकर तनाव की स्थिति बनी। उन्होंने कहा कि कुछ मुस्लिम परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े और मामले में दिल्ली हाई कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसने शांति बनाए रखने के निर्देश दिए।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी टिप्पणी
अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर बोलते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने Donald Trump और Benjamin Netanyahu की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान पर हमले उसी तरह के हैं जैसे गाजा में हुए, और इससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह संघर्ष बढ़ा, तो इसका असर तुर्की और अन्य अरब देशों तक पहुंच सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनका रुख हमेशा से इंसानियत के पक्ष में रहा है और फिलिस्तीन के मुद्दे को वे महत्वपूर्ण मानते हैं।
वाराणसी की घटना को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर धार्मिक संवेदनशीलता, प्रशासनिक कार्रवाई और सामाजिक सौहार्द जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। वहीं, ओवैसी के बयानों ने इस मुद्दे को राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय विमर्श से भी जोड़ दिया है।














