पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया समीकरण उभरता दिखाई दे रहा है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) ने मुर्शिदाबाद में साझा रैली कर राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर जमकर हमला बोला और राज्य में मुस्लिम नेतृत्व को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
मुर्शिदाबाद में गठबंधन की ताकत का प्रदर्शन
बुधवार को मुर्शिदाबाद जिले में आयोजित इस रैली में ओवैसी और हुमायूं कबीर ने मंच साझा किया और साफ संकेत दिया कि उनका गठबंधन भविष्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने वाला है। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में मुस्लिम समुदाय को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया गया है, लेकिन उनकी राजनीतिक भागीदारी और नेतृत्व को आगे नहीं बढ़ाया गया।
ओवैसी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे त्योहारों के दौरान मुस्लिम समुदाय के बीच जाकर केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करती हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी ने अल्पसंख्यकों के विकास की अनदेखी की है।
2029 लोकसभा चुनाव साथ लड़ने का ऐलान
रैली के दौरान ओवैसी ने यह भी घोषणा की कि AIMIM और AJUP 2029 के लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ेंगे। उनका कहना था कि कांग्रेस, लेफ्ट और TMC को समर्थन देने के बावजूद मुस्लिम समुदाय को अपेक्षित राजनीतिक लाभ नहीं मिला।
ओवैसी ने कहा कि बंगाल में मुस्लिम समुदाय को “वोट डालने वाली मशीन” बना दिया गया है और यहां मजबूत मुस्लिम नेतृत्व उभरने नहीं दिया गया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे हुमायूं कबीर का समर्थन करें और समुदाय से नए नेताओं को आगे लाने में मदद करें।
ममता सरकार पर अल्पसंख्यकों की अनदेखी का आरोप
ओवैसी ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि उसने अल्पसंख्यक समुदाय की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज किया है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में गरीब और कमजोर वर्गों को स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व नहीं मिल पा रहा है।
इस मौके पर हुमायूं कबीर ने कहा कि कई आलोचनाओं और चुनौतियों के बाद अब वह ऐसे मुकाम पर पहुंचे हैं जहां ओवैसी उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के “मां, माटी, मानुष” के नारे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार का आम लोगों से कोई वास्तविक जुड़ाव नहीं रह गया है।
मुस्लिम बहुल जिलों पर नजर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार AIMIM-AJUP गठबंधन की नजर खासतौर पर मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे मुस्लिम बहुल जिलों पर है, जहां कई विधानसभा सीटों पर अल्पसंख्यक समुदाय का प्रभाव है। इन क्षेत्रों में 60 प्रतिशत से अधिक आबादी अल्पसंख्यक समुदाय की मानी जाती है और गठबंधन को उम्मीद है कि यहां से उसे मजबूत समर्थन मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गठबंधन मजबूत होता है तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया समीकरण बना सकता है और आने वाले चुनावों में TMC तथा BJP दोनों के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है।














