जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजराइल तनाव को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान ने वह भूमिका निभाई, जो अन्य देश नहीं कर सके, जबकि भारत इजराइल से अपने करीबी संबंधों के कारण वैसी भूमिका निभाने से पीछे रह गया।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वह इस मुद्दे को सफलता या विफलता के रूप में नहीं देख रहे, लेकिन यह मानना होगा कि पाकिस्तान ने एक अहम कूटनीतिक भूमिका निभाई। उनके मुताबिक, भारत के इजराइल के साथ बढ़ते रिश्ते कहीं न कहीं उसकी “कमजोरी” बन गए, जिससे वह इस संकट में सक्रिय भूमिका नहीं निभा सका।
उन्होंने अपनी व्यक्तिगत राय रखते हुए कहा कि अगर भारत के इजराइल से इतने करीबी संबंध न होते, तो वह अमेरिका और ईरान दोनों के साथ अपने अच्छे रिश्तों के आधार पर मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता था।
अमेरिका और ट्रंप पर भी निशाना
सीएम उमर ने अमेरिका की भूमिका पर भी सवाल उठाए और खास तौर पर डोनाल्ड ट्रंप के बयानों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान अस्थिर और विरोधाभासी लगते हैं—सुबह कुछ और, दोपहर में कुछ और और शाम को कुछ अलग बात करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह किसी भी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को शोभा नहीं देती। अगर आम लोग ऐसी भाषा का इस्तेमाल करें तो उनके सोशल मीडिया अकाउंट तक बंद कर दिए जाएं।
“ईरान पर थोपी गई जंग”
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह युद्ध ईरान ने शुरू नहीं किया, बल्कि उस पर थोपा गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सीजफायर असफल होता है, तो इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह इजराइल पर होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि लेबनान में इजराइल की बमबारी और निर्दोष लोगों की मौतें हालात को और बिगाड़ रही हैं, जिससे स्थायी शांति की संभावना कमजोर हो रही है।
सीजफायर और परिणामों पर सवाल
सीएम ने सवाल उठाया कि इस युद्ध का असली उद्देश्य क्या था। उन्होंने कहा कि अमेरिका इसे अपनी बड़ी सफलता बता रहा है, लेकिन जंग से पहले भी होर्मुज जलडमरूमध्य खुला था और मुफ्त था, जबकि अब ईरान इसके लिए टोल टैक्स की बात कर रहा है।
उनके अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम से आम लोगों को नुकसान हुआ है और क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है।
“अमेरिका को इजराइल पर नियंत्रण करना चाहिए”
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर स्थायी शांति चाहिए, तो अमेरिका को इजराइल पर नियंत्रण करना होगा। बिना इसके सीजफायर टिकाऊ नहीं हो पाएगा।














