2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ओमप्रकाश राजभर ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए अपनी पारंपरिक जहूराबाद सीट छोड़कर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री राजभर का यह कदम पूर्वांचल की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर रहा है।
जहूराबाद क्यों छोड़ रहे हैं राजभर?
जहूराबाद सीट को लंबे समय से राजभर का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन यहां के जातीय समीकरण अब उनके खिलाफ जाते दिख रहे हैं। इस सीट पर मुस्लिम और यादव वोटरों का दबदबा है, जबकि राजभर समुदाय की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
2022 के चुनाव में राजभर को जीत समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन और अंसारी परिवार के समर्थन से मिली थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और वही समर्थन इस बार अनिश्चित नजर आ रहा है।
सपा की रणनीति और अंसारी फैक्टर
सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी इस बार जहूराबाद सीट पर पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। चर्चा है कि अफजाल अंसारी की बेटी नूरिया अंसारी को यहां से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। अगर अंसारी परिवार खुलकर मैदान में उतरता है, तो मुस्लिम और यादव वोट बैंक का बड़ा हिस्सा राजभर से दूर हो सकता है।
सवर्ण वोटरों की नाराजगी
जहूराबाद में राजपूत, ब्राह्मण और भूमिहार वोटरों की अच्छी-खासी संख्या है। पिछले कुछ समय में इन समुदायों में राजभर के प्रति नाराजगी बढ़ी है। ये वोटर चुनावी नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं, जिससे राजभर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
अतरौलिया क्यों चुना?
आजमगढ़ को समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। ऐसे में अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ने का फैसला एक बड़ा सियासी संदेश भी माना जा रहा है।
राजभर के इस कदम के पीछे कई रणनीतिक वजहें मानी जा रही हैं:
पूर्वांचल में अपनी पकड़ मजबूत करना
सपा के गढ़ में सीधी चुनौती देना
एनडीए को मजबूत संदेश देना
सपा से सीधी टक्कर
पार्टी सूत्रों के अनुसार, राजभर जहूराबाद से अपने बेटे या किसी करीबी नेता को चुनाव मैदान में उतार सकते हैं, जबकि खुद अतरौलिया से सपा के खिलाफ सीधी लड़ाई लड़ेंगे।
यह फैसला 2027 के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। अब देखना होगा कि जहूराबाद में सपा कितनी मजबूत वापसी करती है और अतरौलिया में राजभर का यह दांव कितना सफल होता है।














