नोएडा सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद उनके पिता पहली बार खुलकर सामने आए हैं। बेटे की शोकसभा के बाद कैमरे पर आए युवराज के पिता की आंखें नम थीं, लेकिन शब्दों में सिस्टम की लापरवाही के खिलाफ गुस्सा साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि उनका बेटा कायर नहीं था, बल्कि वह दो घंटे तक मौत से जूझता रहा, लेकिन समय पर मदद न मिलने के कारण उसकी जान चली गई।
“2 घंटे तक मदद का इंतज़ार करता रहा मेरा बेटा”
युवराज के पिता ने बताया कि जिस जलभराव वाले गड्ढे में युवराज गिरा, वहां से निकलने के लिए उसने पूरी ताकत लगा दी। उन्होंने कहा,
“वह लगातार संघर्ष करता रहा कि कोई आए और उसे बाहर निकाले। अगर कोई समय रहते पानी में कूद जाता या वहां सुरक्षा के इंतजाम होते, तो आज मेरा बेटा जिंदा होता।”
उनका आरोप है कि हादसे वाली जगह पर न तो कोई चेतावनी बोर्ड था, न बैरिकेडिंग और न ही कोई आपातकालीन व्यवस्था।
सिस्टम की लापरवाही पर गंभीर आरोप
भावुक पिता ने कहा कि बेटे की मौत ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया था, लेकिन मीडिया और आम लोगों के समर्थन से उन्हें इंसाफ की उम्मीद मिली। उन्होंने कहा,
“मेरा बेटा वापस नहीं आएगा, लेकिन मैं चाहता हूं कि इस हादसे के दोषियों को सजा मिले, ताकि भविष्य में कोई और परिवार ऐसा दर्द न झेले।”
उन्होंने यूपी सरकार और मीडिया का धन्यवाद करते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
डिलीवरी बॉय मुनेंद्र की बहादुरी की सराहना
युवराज के पिता ने घटना के चश्मदीद और पानी में कूदकर बेटे को बचाने की कोशिश करने वाले डिलीवरी बॉय मुनेंद्र की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा,
“उस लड़के ने अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में छलांग लगाई। अगर उसके पास सही संसाधन होते, तो शायद मेरा बेटा बच जाता। उसका एहसान मैं कभी नहीं भूल सकता।”
SIT की 450 पन्नों की रिपोर्ट पर टिकी नजर
इस मामले में अब सबकी निगाहें SIT की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। बताया जा रहा है कि करीब 450 पन्नों की रिपोर्ट में यह तय किया जाएगा कि हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है—
बिल्डर
निर्माण एजेंसी
या लापरवाह प्रशासन
अब तक SIT टीम 125 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है और चश्मदीद मुनेंद्र को भी बयान के लिए बुलाया गया है।
सवाल जो पूरे सिस्टम पर खड़ा है
यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि शहरी विकास में सुरक्षा को लेकर बड़ी चूक का उदाहरण बन गया है। अब सवाल यह है कि
“क्या युवराज को इंसाफ मिलेगा?
और क्या सिस्टम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक पाएगा?”














