नोएडा के सेक्टर-94 में निर्माणाधीन ‘हैबिटेड सेंटर’ प्रोजेक्ट में एक छात्र की डूबकर मौत के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना ने न सिर्फ निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार को उजागर किया है, बल्कि साइट पर सुरक्षा इंतजामों की गंभीर कमी पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद मौके से प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेज, बोर्ड, निर्माण स्थल की तस्वीरें और यूपी निर्माण निगम का सर्टिफिकेट सामने आया है। इन दस्तावेजों के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास जुलाई 2021 में किया गया था और इसे दिसंबर 2023 तक पूरा किया जाना था। हालांकि लगभग 395 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना अब भी अधूरी पड़ी है।
मौके की तस्वीरों से साफ है कि निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ है और सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर रही। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्र निर्माण स्थल के पास पहुंच गया, जहां एक गहरे गड्ढे में पानी भरा हुआ था। पर्याप्त बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेतों की कमी के कारण वह पानी में चला गया और डूबने से उसकी मौत हो गई।
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कैसे की गई। न तो साइट पर पर्याप्त घेराबंदी थी और न ही स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे। स्थानीय लोगों और परिजनों ने इसे सीधी लापरवाही बताते हुए जिम्मेदार एजेंसियों पर कार्रवाई की मांग की है।
यूपी निर्माण निगम का सर्टिफिकेट सामने आने के बाद अब मामले में एजेंसियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। प्रशासन और पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट की स्थिति, सुरक्षा इंतजामों और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है।
हादसे के बाद इलाके के लोगों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि यह प्रोजेक्ट लंबे समय से अधूरा पड़ा है और सुरक्षा को लेकर पहले भी कई शिकायतें की जा चुकी थीं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों में लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है।














