मध्य प्रदेश में क्रिकेट इतिहास से जुड़ी महिला खिलाड़ियों को सम्मान और आर्थिक सहयोग देने के लिए मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल की है। एसोसिएशन ने पूर्व महिला क्रिकेटरों के लिए मासिक वित्तीय प्रोत्साहन योजना शुरू की है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुकी है। इस योजना का उद्देश्य उन खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता देना है जो बीसीसीआई की पेंशन योजना के दायरे में नहीं आ पातीं।
अध्यक्ष महानआर्यमन सिंधिया का बड़ा फैसला
एमपीसीए के अध्यक्ष महानआर्यमन सिंधिया ने इस योजना की घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश की कई महिला क्रिकेटरों ने उस दौर में खेल को आगे बढ़ाया, जब संसाधन, पहचान और समर्थन सीमित थे। ऐसे में उनके योगदान का सम्मान करना और उन्हें सहयोग देना एसोसिएशन की जिम्मेदारी है।
खिलाड़ियों को मिलेगी मासिक आर्थिक सहायता
नई योजना के तहत खिलाड़ियों को उनके क्रिकेटिंग स्तर और अनुभव के आधार पर मासिक सहायता दी जाएगी:
भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी महिला खिलाड़ियों को ₹12,500 प्रति माह
घरेलू स्तर की महिला खिलाड़ियों को उनकी श्रेणी के अनुसार ₹6,000 से ₹10,000 प्रति माह
75 वर्ष से अधिक आयु की महिला खिलाड़ियों को ₹7,500 प्रति माह सहायता
यह योजना आवेदन-आधारित होगी, ताकि जरूरतमंद खिलाड़ियों तक सहायता सुनिश्चित रूप से पहुंच सके।
पुरुष क्रिकेटरों और अंपायरों के लिए भी राहत
एमपीसीए समिति ने पूर्व पुरुष क्रिकेटरों और अंपायरों के लिए भी आर्थिक लाभ बढ़ाने का फैसला किया है, खासकर उन लोगों के लिए जो बीसीसीआई पेंशन योजना से बाहर हैं।
1–4 मैच खेलने वाले सेवानिवृत्त पुरुष क्रिकेटरों को ₹7,000 प्रतिमाह
5–14 मैच खेलने वालों को ₹10,000 प्रतिमाह
15–24 मैच खेलने वालों को ₹12,500 प्रतिमाह
इसके अलावा, बीसीसीआई स्तर के रिटायर अंपायरों को ₹10,000 प्रतिमाह, जबकि राज्य स्तर के अंपायरों को ₹6,500 प्रतिमाह दिए जाएंगे। 75 वर्ष से अधिक आयु के अंपायरों को अतिरिक्त ₹7,500 प्रतिमाह सहायता भी प्रदान की जाएगी।
मानदेय में भी बढ़ोतरी
एमपीसीए ने अंपायर, स्कोरर और चयनकर्ताओं के मानदेय में भी बढ़ोतरी की है:
इंटर-डिवीजनल मैचों के अंपायर: ₹5,000 प्रति मैच
स्कोरर: ₹2,500 प्रतिदिन
चयनकर्ता: ₹9,000
इसके साथ ही कोचों की प्रोत्साहन राशि में भी संशोधन किया गया है।
अतीत के योगदान को सम्मान
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राज्य क्रिकेट में एक मिसाल बन सकती है। इससे उन खिलाड़ियों को सम्मान और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद क्रिकेट को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।














